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Pakistan Water Crisis: पाकिस्तान में बूंद-बूंद पानी को हाहाकार, क्या वाकई जिम्मेदार है भारत? | Oneindia Hindi

पाकिस्तान में पानी का संकट गहराता जा रहा है और शहबाज़ शरीफ सरकार हमेशा की तरह भारत तथा सिंधु जल संधि पर ठीकरा फोड़ रही है। जानिए कनाडा की जियोपॉलिटिकल मॉनिटर रिपोर्ट ने कैसे पाकिस्तान के इस झूठे दावे का पर्दाफाश किया है!

कनाडा स्थित 'Geopolitical Monitor' की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान का जल संकट भारत के कारण नहीं, बल्कि उसकी अपनी दशकों पुरानी खराब योजनाओं, बुनियादी ढांचे की बर्बादी, कमजोर प्रशासन और प्रांतों के आपसी विवादों की वजह से है। पाकिस्तान कृषि प्रधान देश होने के बावजूद आधुनिक सिंचाई तकनीकों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है और नहरो के रिसाव के कारण भारी मात्रा में पानी बर्बाद होता है।

इसके अलावा, सिंध, पंजाब, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के बीच पानी के बंटवारे को लेकर आपस में ही भारी तनाव है। कालाबाग बांध जैसे प्रोजेक्ट्स पर राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं। 1960 की सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के तहत अधिकार मिलने के बावजूद पाकिस्तान अपने अंदरूनी जल प्रबंधन और भूजल संरक्षण में पूरी तरह नाकाम रहा है।

इस वीडियो में देखिए पाकिस्तान के गहराते जल संकट की इनसाइड स्टोरी, अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट का कड़वा सच और जानिए क्यों शहबाज़ शरीफ सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए भारत पर इल्जाम लगा रही है।


Pakistan is facing a severe water crisis, but instead of fixing its internal management, Islamabad continues to blame India and the Indus Waters Treaty (IWT). A report by Canada-based Geopolitical Monitor reveals that Pakistan's water shortage stems from poor infrastructure, agricultural wastage, provincial disputes between Sindh and Punjab, and decades of misgovernance. Watch this report on the reality of Pakistan's water emergency.


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Transcript
00:07पाकिस्तान में पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है।
00:40पाकिस्तान की समस्या सिर्फ सीमा पार से आने वाले पानी या सिंधू जल संधी से जुड़ी नहीं है।
01:00के सबसे अधिक पानी पर निर्भर क्रिशी देशों में से एक है। देश में उपलब्ध पानी का बड़ा हिस्सा सिंचाई
01:06में इस्तिमाल होता है।
01:07लेकिन पानी पहुचाने वाली नहरों और सिंचाई व्यवस्था में भारी मात्रा में पानी बरबाद होने की समस्या लंबे समय से
01:15बनी हुई है।
01:16पुरानी नहरे, रिसाव और आधुनिक सिंचाई तकनीकों का सीमित इस्तिमाल इस संकट को और गंभीर बनाते हैं। इसके अलावा पाकिस्तान
01:24में भूजल का भी बड़े पैमाने पर दोहन हुआ है।
01:28कई इलाकों में किसान और शहरी आबादी भूजल पर निर्भर है। लेकिन उसके इस्तिमाल और संग्रक्षन के लिए प्रभावी व्यवस्था
01:35कमजोर रही है। नतीजा ये है कि कई क्षेत्रों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है।
01:41अब आते हैं बांधों पर। पाकिस्तान लंबे समय से बड़े बांधों को जल और उर्जा संकट का समाधान बताता रहा
01:48है। लेकिन बांधों का निर्मान सिर्फ इंजिनेरिंग का सवाल नहीं है। इसके साथ पैसा, जमीन, पर्यावरन, विस्थापन और राजियों के
01:56
02:09भीतर, पंजाब, सिंध, बलोचिस्तान और खैबर पखतून ख्वा के बीच भी तनाव के खबरे सामने आती रही है। सिंध लंबे
02:17समय से आरोप लगाता रहा है कि उसे उसके हिस्से का पानी परियाप्त मात्रा में नहीं मिलता। ऐसे में ये
02:23सवाल उठता है कि अगर पाक
02:37क्रिशी और उद्योग दोनों को पानी और बिजली की जरूरत होती है। जल विध्युत परियोजनाओं और सिंचाई के बीच संतुलन
02:44बनाना आसान नहीं है। आलोचकों का कहना है कि उर्जा जरूरतों, क्रिशी प्रात्मिकताओं और प्रांतिय हितों के बीच बेहतर ता
03:05कि छे नदियों के पानी के उप्योग को लेकर दोनों देशों के अधिकार और जिम्मेदारियां तै की गई थी। भारत
03:11को पूर्वी नदियों, रावी, ब्यास और सतलुज पर अधिक अधिकार मिले जबकि पश्चमी नदियां, सिंधु, जेलम और चिनाब मुख्य रू�
03:20पाकिस्तान के लिए निर्धारत की गई, हाला कि भारत को कुछ सीमित उप्योग की अनुमती भी है।
03:50पाकिस्तान में प्रतिव्यक्ती पानी की उपलब्धता भी दशकों में तेजी से कम हुई है। आबादी बढ़ने के साथ वही जल
03:57संसाधन अब ज्यादा लोगों की जरूरत पूरी कर रहे हैं। ऐसे में अगर जल संग्रक्षन, आधनिक सिंचाई और शहरी जल
04:04प्रबंध
04:17अपनी जगा है लेकिन पाकिस्तान की घरेलू नीतियां और जल प्रबंधन भी उतने ही महत्वपून है। शहबाज शरीफ सरकार के
04:24सामने चुनौती सिर्फ भारत के खिलाफ बयान देने की नहीं है बलकि अपने देश के अंदर पानी के इस्तिमाल और
04:30वित्रण को सुधार
04:31नेकी है। सैन्य नेत्रित्व और राजनीतिक सरकार अगर वास्तव में जल संकट को राष्ट्रिय सुरक्षा का मुद्दा मानते हैं तो
04:39उन्हें पानी की बरबादी रोकने, सिंचाई व्यवस्था आधुनिक बनाने, भू जल संग्रक्षन, बांधों और जलाशेयों की क्
04:46और प्रांतों के बीच भरोसा कायम करने पर ध्यान देना होगा। क्योंकि पानी, किसी भी देश की अर्थ व्यवस्था, क्रिशी
04:53और सामाजिक स्थिर्ता की बुन्याद है। पाकिस्तान अगर हर बून की कमी का दोश भारत पर डालता रहेगा, लेकिन अपनी
05:00जल व्यवस्
05:14का ठीकरा भारत के सिर फोड़ेगा।
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