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  • 21 minutes ago
क्लाइमेट, भौगोलिक परिस्थितियां, पर्यावरण प्रदूषण, खाद और कीटनाशक सभी मिलकर खुशबू को चुरा रहे हैं. अतुल कुमार शर्मा की रिपोर्ट.

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Transcript
00:13खुश्यों का पल हो या फिर गम का महौल, फूल हमारे जीवन में शुरुवात से लेकर जीवन के अंध तक
00:20साथ होते हैं.
00:21लेकिन क्या आप जानते हैं, पूजा की थाली से लेकर शादी तक में इस्तेमाल होने वाले ये फूल अपनी खुश्बू
00:29खोते जा रहे हैं.
00:55फूलों के कारोबारी कहते हैं कि लोगों को अब फूलों की खुश्बू से कोई मतला हैं, पूलों की खुश्बू से
01:00कोई मतला है।
01:16फूलों के दुकानदार कहते हैं कि दुर्ग भिलाई में फूलों का आयात बैंगलोरू, नागपुर, कोलकाता और हैदराबाद से होता है।
01:26यहां के फूलों को ग्राहक ज्यादा पसंद करते हैं।
01:30दुकानदार कहते हैं कि 36 गड के कुछ जिलों में भी फूलों की खेती होने लगी है।
01:47एक्सपर्ट बताते हैं कि फूलों से खुश्पु का गायब होना वहां के भागौलिक कारण और परियावरन प्रदूशन की बज़ा से
01:54होता है।
01:56जबकि उद्ध्याने की विभाग का कहना है कि रासायनी खाट का इस्तमाल इसके लिए जिम्मदार है।
02:10फूलों की खेती करने वाले किसान कहते हैं कि बाजार में डिमांड के हिसाब से वो खेती करते हैं और
02:17चाहते हैं ज्यादा से ज्यादा मुनाफ़ा उनको मिले।
02:20लोग भी ये चाते हैं कि कम से कम जगह में वो अपने घर में फूल लगा पाए
02:25भले ही वो hybrid फूल खुशपु दे या न दे घर सुन्दर लगना चाहिए
02:31ETV भारत के लिए दुर्ग से अतुल कुमार शर्मा की रिपोर्ट

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