00:00खुशामदीद इस नए एक्स्पेनर में आज हम कराची पोर्टरस्ट बिल्डिंग की जबरदस तारीख और आज के दोर में इसकी एहमियत
00:07पर बात करेंगे
00:07मतलब ये इमारत सिर्फ पत्थरों का कोई आम ढाचा नहीं है बलके एक सदी से ज्यादा पुरानी एक जीती जाकती
00:15दास्तान है
00:15तो चलें शुरू करते हैं
00:18अब सबसे पहले जरा इस दिल्चस्प सवाल पर गोर करते हैं जो इस शांदार इमारत के इप्तिदाई दिनों की पूरी
00:24कहानी बियान करता है
00:25आखिर ऐसा क्या हुआ कि बंदरगहा के इंतिजामी मामलात के लिए बनाया गया एक मास्टर पीस
00:30रातो रात पांसो बिस्तरों के एक बड़े मिलिटरी अस्पिताल में तबदील हो गया
00:34वाकई ये एक ऐसी कहानी है जो तजस्स से भरी हुई है
00:38स्क्रीन पर देख सकते हैं कि आज हम किन चीज़ों पर बात करने वाले हैं
00:42एक अजीम उश्शान बहरी विजन
00:44पहली जंग अजीम के अस्पिताल का मोड
00:46फन तामीर के इमतजाज का शाकार
00:48उसकी तारीखी रहधारियों के अंदर का मंज़र
00:51और आखिर में फाल ड्यूटी की एक सदी
00:53तो शुरुआत करते हैं अपने पहले हिस्से से
00:56एक अजीम उशान बहरी विजन
00:59अब यहां मज़े की बात ये है
01:01कि इस इमारत को 1912 में
01:03जिस मेमार ने डिजाइन किया था
01:04यानी जॉर्ज वाइट
01:06ये वो ही साब हैं जिनोंने
01:07मुंबई के मशूर गेटवे आफ इंडिया
01:10का नक्षा भी बनाया था
01:11इसको बनाने का असल मकसद ये था
01:13कि कराची की बंदरगाँ पर आने वाले
01:15जो भी बहरी मेहमान हों वो बस इसे
01:17देखते ही रह जाएं ये वाकई
01:19इस शहर की शानो शौकत की एक
01:21अलामत बनने वाली थी
01:22और जरा इस लागत पर तो गोर करें
01:24तकरीबन दस लाक रुपए
01:26इस दौर के हिसाब से ये कोई
01:28मामूली रकम नहीं थी
01:29बरतानवी राज ने इस पर जबरदस सरमाया कारी की
01:31ताके जनवरी 1916 तक
01:33इस शानदार इमारत की तामीर
01:35हर हाल में मुकमल हो जाए
01:36ये टाइम लाइन हमें बताती है
01:38कि इस इमारत की शुरुआती तारीख
01:40कितनी तेजी से आगे बड़ी है
01:421912 में काम शुरू हुआ
01:441916 में इसका इफ्तिता करके
01:46इसे KPT के हवाले कर दिया गया
01:48लेकिन फिर अचानक ही
01:49इस इमारत को एक बिलकुल मुक्तलिफ
01:51और हंगामी मिशन संभालना पड़ा
01:53जिसके बाद 1919 में
01:55अस्पताल के तौर पर इसका सफर खत्म हुआ
01:57अब आते हैं अपने दूसरे
01:59हिससे की तरफ
02:00पहली जंग अजीम के अस्पताल का मोड
02:03तो यहां सबसे एहम बात
02:05समझने वाली ये है
02:06कि एक ऐसी इमारत
02:07जो खालिस अतन तिजारती
02:09और इंतिजामी मकासित के लिए
02:11बनाई गई थी
02:11वो रातो रात पांच सो बिस्तरों के
02:14इंडियन जनरल अस्पताल में तबदील हो गई
02:16मतलब उसने पहली जन्ग अजीम के दोरान
02:19फौरी तोर पर एक इंतहाई एहम
02:21इंसानी हमदर्दी का काम शुरू कर दिया
02:23जरा तसवूर करें
02:24इन इपदाई तीन सालों में
02:26इस इमारत की राधारियों में
02:27बहरी अफसरान के बजाए
02:29डॉक्टरों और नरसों की भागदोर लगी हैती थी
02:31मई 1919 तक ये पूरी अमारत
02:34एक मिलिटरी असमताल की तोर पर काम करती रही
02:36जिसके बाद जाकर कहीं
02:37उसे इसके असल बहरी कामों के लिए
02:39वापस बहाल किया गया
02:40आगे बढ़ते नमबर तीन पर
02:42फने तामीर के इमतिजाज का शाहकार
02:45एक मुकामी अर्दू इशाद का ये इक्तबास जरा पढ़ें
02:48बहादरी के साथ रात और दिन
02:50साहली हवा के सर फिरे थपेड़ों का मुकाबला करती
02:53फक्रिया इमारत
02:54ये लाइन्स वाकई इस इमारत के
03:12इतनी खुबसूरती से एक साथ मिलाए गई है
03:14कि एक शानदार शाहकार बन गया है
03:16इसका मरकजी, रोमन गुमबद
03:18और बड़ी-बड़ी महराबे इसकी
03:20जिन्दा मिसाले हैं
03:21इमारत का ये जो खमदार बैरूनी हिस्सा है
03:24वो देखने वालों को बिलकुल मसहूर कर देता है
03:26इसे भारत के शहर जैपुर से लाए गए
03:29खुबसूरत पीले रंग के पत्थर से बनाया गया है
03:31जरा तसवर करें
03:33साहिल के नीले आसमान के पीछे
03:35जैपुर के इस पीले पत्थर का नजारा
03:37ये वाकई आँखों को ठंडग बक्षने वाली खुबसूरती है
03:40अब चलते हैं चोथे हिस्से की तरफ
03:42तारीखी राहदारियों के अंतर
03:45अंदर जाएं तो उची छटों वाले
03:47बड़े बड़े कमरों में कमाल की
03:49सया और सफैज सिमिंट की टाइले लगी है
03:51जिने धोना बहुत आसान है
03:53और इन गहरे सबस रंग की बड़ी खिड़कियों को तो देखें
03:55ये सारी चीजे सिर्फ दिखावे के लिए नहीं थी
03:58बलके उन्हें खास तोर पर साहिल की नमकीन
04:01और नमी वाली हवा को सामने रखकर डिजाइन किया गया था
04:03इसके लावा पूरी इमारत में इंतहाई कीमती सागोन की लकडी
04:07जिसे हम टीक वोड कहते हैं उसका इस्तिमाल किया गया है
04:11और कमाल की बाद ये है किसमें एक मुनफरित खुले पंजे वाला लकडी का एलिवेटर
04:15और लंदन की एलिट ब्रदर कमपनी की तारीखी घडियां आज भी मौजूद हैं
04:20सोचें इस लकडी के एलिवेटर में सवार होकर उननीसवी सदी की घडियों को देखना कैसा महसूस होता होगा
04:26बिलकुल किसी टाइम मशीन में बैटने के बराबर
04:29इसी रोमन तर्स के बड़े गुंबत के बिलकुल नीचे एक बोर्ड रूम और एक रिकॉर्ड रूम मौजूद है
04:35और ये कोई आम रिकॉर्ड रूम नहीं है
04:37यहां 1893 से लेकर अब तक की असल खुफिया कारवाईयों का पूरा रिकॉर्ड संभाल के रखा गया है
04:44जिससे ये साबित होता है कि ये इमारत सिर्फ एक यादगार नहीं बलके एक सदी से ज्यादा की बहरी तारी
04:50का एक इंतहाई महफूज वॉल्ट है
04:52और अब हमारे आखरी हिस्से की बारी फाआल ड्यूटी की एक सदी
04:57ये इमारत किसी खामोश म्यूजियम जैसी बिलकुल नहीं है
05:01आज भी ये केपीटी बिलिंग इनसानी तवानाई से भरपूर एक नहायत मुतहरे काम की जगा है
05:06यहां सरकारी दोरे होते रहते हैं और अमले की जानिब से क्रिसमस जैसी तक्रीबाद भी मनाई जाती है
05:11ये जदीद इंतजामी जिन्दगी का एक जीता जाकता और मस्रूफ तरीन मरकज है
05:16और इन तारीखी दिवारों के अंदर से किस पैमाने पर काम होता है
05:19ये डेटा उसका सबूत है
05:21हम देख सकते हैं कि किस तरह हर महीने लाखों टन खुशक और माई कारगो का इंतजाम किया जाता है
05:272012 के इन चंद महीनों के आदादों शुमार ही देख लें
05:30ये उसकी मौजूदा तिजारती एहमियत को वाज़े करने के लिए काफी है
05:34के पीडी डीप वाटर कंटेनर पोर्ट पर नए साल के मौके पर होने वाली ये शानदार आतिश बाजी वाकई देखने
05:41लाइक है
05:41ये इस बात की अलामत है कि एक तारीखी अदारा किस तरह मुसलसल खुद को एक रोशन और मुतहरिक मुस्तक्बल
05:47की तरफ लेकर जा रहा है
05:49पुराने और ने का ये संगम बहुत जबरदस्त है
05:51तो आखिर में ये एक ऐसा सवाल है जो सोचने पर मजबूर कर देता है
05:56हमारे माजी की और कौन सी अजीम उशाने मारते हैं
05:58बिलकुल हमारे इर्दगर्द मौजूद रहकर खामोशी से आलमी तिजारत के मुस्तक्बल को चला रही है
06:03अगली बार जब भी किसी तारीखी अमारत के पास से गुजरें तो इस बात पर जरूर गौर कीजिएगा
06:08हमारे इस explainer में शामिल होने का बहुत शुक्रिया
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