00:00रोशनी
00:01जैसे कि अंधेरे और अकेले पन में रहने की बिलकुल भी आदत नहीं थी
00:06उसे आज ना चाहते हुए भी घर में अकेले रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है
00:13क्योंकि हाला थी कुछ ऐसी थी जिसकी वज़ा से आज अचानक उसके पती को शहर से बाहर जाना पड़ जाता है
00:22इसलिए आज की रात रोशनी अपने बिस्तर पर करवटे बदलते हुए यही सोच रही होती है
00:30कि आखिर वो ये रात इतने बड़े घर में अकेले कैसे गुचारेगी
00:35लेकिन तब ही उसे अपने गली के चौकिदार नंदु की आवाज सुनाई देती है
00:41जागते रहो
00:44एक काम करती हूँ चौकिदार को ही बुला लेती हूँ
00:52अरे वाब इस किताब में तो चौकिदार भी है
01:00जी मैडम जी
01:26इदार आव जरा
01:26अभी आया
01:28जी मैम साब
01:40अच्छा ये बताओ तुम्हारा नाम क्या है
01:42जी नंदु लेकिन सब लोग प्यार से चौकिदार नंदु बुलाते हैं
01:46ओ चौकिदार नंदु
01:48नंदु आज रात मेरे लिए काम करोगे
01:51जी कहिए मैम
01:52क्या तुम मेरे घर की आज रात के लिए चौकीदारी करोगे?
01:56क्यों मेम साब?
01:57क्या बताऊं?
01:59आज रात ना मेरे पती घर से बाहर गए हैं किसी काम के लिए
02:02और मैं घर में अकेली हूँ
02:04मुझे डर लग रहा है
02:05क्या पता कोई चोड लुटे रहा घर के अंदर घुसा है
02:09और मैं अकेले क्या करूँगे फिर?
02:10अर हाँ
02:12आज रात की चोड़ी दारी के लिए मैं तुम्हें अलग से पैसे भी दूँगी
02:15ठीके मेम साब
02:16फिर आज रात आपके घर के बाहर ही पैरे दारी करूँगा
02:18अच्छा सुनो
02:19तुम्हें का और काम बताना था
02:21जी
02:22चलो मेरे साथ
02:23अब चलिए
02:23ये हमारी नई कार है
02:33जल्दी जल्दी में मेरे पती से अंदर पार करना ही भूल गए
02:36आज रात तुम्हें इसका भी ध्यान रखना है
02:38अरे मेडम आप बिलकुल भी टेंशन मत लीचे
02:41आज रात मैं आपके सारे समान की चोकेदारी करूँगा
02:44हमारा नाम नंदू चोकेदार है
03:03हम सारी चीजों की चोकेदारी करते हैं
03:06जाकते रहो
03:09जाकते रहो
03:12अब चलो बैठ जाते हैं
03:19चलो किताब पढ़ लेता हूं
03:28आखिर में रात बार टाइम भी तो पास करना है
03:42शौकेदार नंदू को आज तक पूरी जिन्दिगी में किसी इतनी खुबसूरत आउरत ने इतने प्यार से तैंकियो नहीं बोला था और ना ही कभी उसकी ऐसी तारीफ की थी
03:56इसे लिए रोशनी मेडम के लिए नंदू के मन में एक अलग किसम का अकरशन पैदा होने लगता है
04:03जिसमें वो चाहता है कि वो रोशनी मेडम के घर के बाहर नहीं बलकि घर के अंदर जाकर पहरा दे
04:12ताकि वो रौश्णी मैडम के आकर्शक रूप का भी नजारा लेता रहे।
04:17नंदू तुम घर के अंदर कैसे आए?
04:29अरे मैडम, ये मत पूझो के कैसे आगए? ये पूझो के क्यों आगए?
04:35क्यों आए?
04:36अरे मैडम, मैं बाहर पहरेदारी कर रहा था, तो मुझे बाहर से खबर मिलिये कि दो लुटेरे इस एरिये के किसी घर में गुझ गए हैं
04:44नंदू, अच्छा हुआ तुम आगए, मुझे तो बहुत डर लग रहा है, नहीं तुम्हें अखेली क्या करती?
04:53चौकिदार नंदू की बात सुनते ही, रोश्नी एकदम से डर जाती है, और नंदू को उस वक्त का एक मात्र सहारा मान कर उसके गले लग जाते हैं
05:04नंदू, आज रात के लिए तुम यहीं रुख जाओ ना? मुझे डर लगने लगा है, रुख जाओगे ना?
05:13जी मैडम, जैसा आप कहें, तो रुख जाएंगे
05:19नंदू? नंदू? नंदू? अरे, जी मेम साब?
05:36कहा खो गय थे तुम? अरे, मेम साब, कहीं नहीं, बस ऐसे ही
05:41यह लो, तुम्हारे लिए चाह बना कर लेकर आई हूँ
05:44अरे, मेम साब, इसकी क्या ज़रूरत थी?
05:47तुम मेरे लिए इतना सब कुछ करते हो, तो मेरा भी तो फर्ज बनता है ना, तुम्हारे लिए कुछ करने का
05:52जी मेम साब
05:53तुम्ही बाहर ऐसे बैठने में अनकामफडेवल लग रहा होगा न
05:56मैं एक काम करती हूँ, तुम्हारे लिए चेर लेकर आती हूँ
05:59वैसे मेम साब, आप चाह नहीं पींगी?
06:01नहीं, मैं चाह नहीं पीती
06:03नहीं, मैं चाहे नहीं पीती, रुको ना, मैं तुम्हारे लिए चेयर लेकर आती हूँ
06:24ये लो, इस पे बैठके पूरी रात पहरे दारी करना, अब मैं जारी हूँ सोने, लाओ कब दो
06:31नंदू के प्रती, रौशनी मैडम का कोमल सभाव, आकरशन के स्तर को और उपर की और बढ़ता चला जा रहा था
06:42इसलिए नंदू अब इतना भी नहीं चाहता था, ये रौशनी मैडम उसका जूठा चाय का कब भी छुए
06:49बलकि अब चौकिदा नंदू कोमल सभाव वाली रौशनी मैडम को बड़े ही कोमल तरीके से छूखर बहा सारा प्यार देना चाहता था
07:00ये क्या कर रहे हो नंदू, हाथ छोड़ा मेरा
07:05मैडम, हाथ छोड़ने के लिए थोड़ी पकड़ा है
07:09आखिर तुम्हारा इरादा क्या है?
07:12मैडम, मेरा इरादा आपको उठाने का है
07:17रात भर प्यार करने का है
07:23चौकिता नंदू जिस स्ने और प्यार से मैडम रोशनी को अपनी बाहों में उठाकर बिस्तर तक ले जाता है
07:32उसी स्ने और प्यार से मैडम रोशनी का पती भी उसको बिस्तर पर अकसर ले जाया करता था
07:39और अब चौकिता नंदू की ऐसी प्रतिक्रियाएं मैडम रौशनी को ऐसा महसूस करवाने लगती हैं
07:47जैसे आज की रात ना होते हुए भी उसका पती उसके साथ हूँ
07:52नंदू?
08:07नंदू, हाथ छोड़ो मेरा, मुझे कप अंधर लेकर जाना है
08:14अरे मिम साब, मैं तो कप पकड़ा हुआ था, मेरी चायनी खत्म हुई थी
08:18तुम जागते आँखों से भी सपने देखते हो, ये चेयर पे बैठो, मैं जा रही हूँ सोने
08:24सुच में यार, किताब की कहानी तो बहुत ही असरदार है
08:34कहां-कहां दिमाग पहुचा देती है
08:37चलो, आगे की कहानी पढ़ता हूँ
08:54रोशनी के हातों से बनी गरम चाय, अब चौकिदा नंदू की रगों में गरमाहट से भरा
09:01वो सुकून देती है, जो सिर्फ एक बहुत चादा प्रेम करने वाली पत्नी ही सिर्फ अपने पत्ती को दे सकती थी
09:09मगर इस बार चौकिदा नंदू, उस गरमाहट भरे सुकून, बदला अब अपनी ही अंदाज में चुकाना चाहता था
09:19मैडम रोश्नी का तकी से लिपट कर सुना, नंदू को साप साप इस बात का हैसास करवा रहा था की
09:40नंदू, तुम यहाँ, मेरे बिस्तर पर
09:50हाँ, तो कि मुझे आपको ऐसे अकेली सोती हुए देखकर अच्छा नहीं लगा
09:56तो मैंने सोचा कि आज की रात मैं आपके पती के जगह सोकर आपकी साथ बिताऊंगा
10:02ताकि आपको इस तक्ये को अपना बना कर सोने के जरुवत नहीं पड़ेगी
10:22ऐसी बात है, तो फिर ठीक है
10:24अगर तुम मेरे इस अकेले पन को दूर करना चाहते हो
10:29तो फिर आज मैं तुम्हें ऐसा प्यार दूँगी जो मैं अपने पती को देना चाहती थी
10:34अगर नंदू नंदू गाड़ी का है अमारी गाड़ी गाड़ी अगर गाड़ी नहीं मिली नंदू
10:58मेरे पती तुम्हें छोड़ेंगे नहीं जाओ गाड़ी देखो पहले आप इहीं रुकिए मैं देख के आता हूं
11:03पता नहीं गाड़ी कौन ले गया अब मैं क्या करूं
11:10इस किताब ने तो अच्छे खासे लगवा दिये मेरे ठेक इसको
11:20इसको
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