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  • 7 months ago
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00:00बंटी अपने महले का उभरता हुआ चोर था, जो पांच-छे महीने से सिर्फ छोटी मोटी चोरिया करके अपना गुजारा चला रहा था।
00:08लेकिन इस बार वो एक ऐसे घर में डाका डालने का मन बनाता है, जहां से उसे काफी की इंगती समान मिलने की पूरी उमीद थी।
00:30जिस घर में वो आज कीमती समान चोरी करने जा रहा था, उसी घर में एक ऐसी खूबसूरत परी भी रहती थी, जिसके योवन का मदिरा पान करने के लिए महले का हर नव युवक सपना देख रहा था।
00:45अब जहां महले के नव युवक कलपना के योवन के सुख लेने का सपना देखा करते थे।
00:53वहीं कल्पना के जीवन में भी वो सुख सिर्फ कल्पना करने लायक ही था
00:58चुकि लंबे समय से अपनी खडूस सास के साथ रहते रेते
01:02उसका जीवन सिर्फ चूले और चोके तकी सीमित रह गया था
01:06अब वो हर रोज इसी उमीद में सोती है
01:09कि कब उसका पती दुबई से वापिस आएगा
01:12और उसको वो सुख देगा जो वो कभी किसी गैर मर्द से नहीं ले सकती थी
01:17माजी
01:24मैं क्या बोल रहे थी ना कि
01:28बहुत दिन से हम लोग घुमने नहीं गए ना कहीं
01:31चलो ना कहीं बाहर घुमने चलते हैं
01:35अच्छा मेरा बेटा वहां कमर तोड महनत करके पैसा कमा रहा है
01:40और तु यहां घुमने की बाद कर रही है चल सबजिकाट
01:44यह तो बड़ी लाजावाब खानी लग रही है
02:05कल्पना का अकर्शन से बड़ा फुपसूरत सुदोल बदन
02:10चोर बंटी के दिमाग को भी बाकी युग को पी तरह चकाचौन कर देता है
02:16जिसकी वज़ा से चोर बंटी अपने असली मकसद से भटक कर
02:20कल्पना को ही अपना मकसद बना लेता है
02:23यह तो वही कहानी वाली रड़की जैसी लग रही है
02:29चिल्लाने की कोशिश मत करना तुम्हें पता है तुम चिल्लाओगी तो क्या होगा पता है ना
02:42कौन हो तुम मैं चोर हूँ और घर का कीमती सामान चोरी करने के लिए आया हूँ
02:52डरो मत यहां कोई नहीं आएगा मेरी सास अंदर है लेकिन उनको कम सुनाई देता है अच्छा पर ठीक है तुम्हें मत डरो यह गन्नकली है
03:07क्या हां इसके लिए मैं कह रही थी तुमको जो चोरी करना है तुम चोरी कर लो मैं कुछ नहीं बोलूंगी
03:18नहीं तुमारी खुबसूरती को देखकर मेरा इरादा बदल चुका है तो अब क्या चाहते हों मैं तुम्हें वो मज़ा देना चाहता हूं जो तुम्हारे पती की गैर मोजूदगी में तुम्हें नहीं मिला तो फिर किस बात का वेट कर रहे हो
03:33कौन है महां कि बहू हाँ कि बहू हाँ कि माजी है
03:51इतनी रात को हॉल में क्या कर रही हो माजी मैं तो वाश्रूम जाने के लिए उठी थी लेकिन मुझे लगा वहाँ सोफे के पीछे कोई है अब इतनी रात गये इस घर में कौन आएगा भला
04:11अब सुन लिया कौन था परदे के पीछे अब जाओ और जाके सोजाओ ठीक है माजी
04:30अब इसके भी वहम करने के आदत जाती नहीं
04:33कर चाच मुझे आएHaु होता है
04:41मुझे मुझे वहम क तdyहने है
04:43को तोध फाव थे जाए바
04:46सबदके सतनária कर दूए मिए
04:51कुछा भGu謊
04:52बंटी अपनी चतुराई से बिल्ली की आवाज निकाल कर बच तो जाता है
05:09मगर खुबसुरत कल्पना के योवन की आग अभी भी बंटी के शरीर के बीतर जल रही होती है
05:15और वहीं पती का अभाब और सास का मानसिक तपाब कल्पना को कभी चैन की नींद नहीं लेने देता
05:23कल्पना आजादी से भरी जिन्दगी जीना चाहती थी और वो सब करना चाहती थी जो भी उसे करना अच्छा लगता था
05:32उसकी कॉलिज के समय से एक ही ख्वाइश थी कि वो कभी किसी ऐसे गैर मर्द के साथ संभोग करें
05:40जिसे ना वो जामती हो ना पहचानती हो
05:45उसकी खुद की कल्पना की दुनिया बहुती अलग के समकी थी
05:49जिसको वो इस घर की चार दिवारी में रहकर पूरा करने का सोच भी नहीं पा रही थी
05:54मगर अब बंटी चोर ने भी अब पूरा इरादा कर लिया था
05:58कल्पना की उस काल्पनिक इच्छा को पूरा करने का जिसकी वो कल्पना अपने कॉलेज के दिनों में किया करते थी
06:19कि खिड़की से अंदर आ गया अच्छा तो ये बात है आप कहींगी तो मैं खिड़की से बाहर चला जाओंगा
06:26मैं तुम्हें एकी कंडिशन पे इस घर से बाहर जाने दूँगी
06:33कैसी कंडिशन बंटी चोर की मासूमियत देखकर कलपना को उस पर गुस्सा आने की बजाए उल्टा प्यार आने लगता है
06:40जो कितना मासूम और इमानदार जोर उसने अपनी जिंदगी में पहले कभी नहीं देखा था
06:47अगर तुम मेरी इच्छा पूरी कर दोगे तुम मैं तुम्हें तुम्हारे इच्छा पूरी करने दूँगी
06:56कलपना भी बहुत मासूम दिल की थी
07:10उधारी मांगने वाले भी आधी रात को फोन कर देते हैं
07:21इस किताब को पढ़ने में इतना मज़ा आ रहा है कि दिमाग खराब हो गया है
07:26इसको अराम से पढ़ूगा पहले पुरा काम कर लेता हूँ
07:40घर का सारा का सारा पैसा सास के कमरे में होगा
07:54वहीं ट्राय करता हूँ शायद कुछ तो मिले
08:10बुक्रेकर साइड़ सक्षाल
08:37अब इस अलमारी की चाबी कहां रख्खी होगी इस बुढ़िया ने
09:07कि अलमारी कोज़िया ने बिदाए रख्खी जसाओ ऑगारी के अवादाः कुल झालमारी का अपने शाराला है
09:37वाह इस बुड़िया ने तो लगता है सारा का सारा खजाना तेरे लिए इस अलमारी में छुपा कर रखा था
10:07कि यहां एक बड़ी ने पार गे कली तो हुआ कर दो
10:22एक बार और देख लिता हुआँ
10:37मज़ा आगया
10:47इस बार बहुत माल मिल गया
11:07अभी टाइम है बाहर जाओं तो पुलिस पकड़ लेगी यहीं बैटके पढ़ लेता हूं यहां कोई डर नहीं है थोड़ी देर बात निकलता हूं
11:18उठा पटक
11:26कल्पना उदास मन से अपने कमरे से बाहर आकर बैट जाती है और सोचने लगती है कि कब उसे अपनी मर्जी से बाहर की दुनिया में फिर से घुमने का मौका मिलेगा
11:41क्योंकि उसकी सास उसको कहीं भी अकेला नहीं छोड़ती थी वहीं दूसरी तरफ बंटी ने अपना चोरी का काम तो पुरा कर लिया था मगर उसे अभी भी किसी चीज की कमी मैसूस हो रही थी और वो थी कल्पना के चेहरे पर खुशी की
11:56तभी चोर बंटी वापस से अपने कदम कल्पना की और बढ़ाता है और उसके पीछे जाकर उसके गले में उसका ही सोने का हार पैनाता है
12:06तुम तुम अभी तक गए नहीं और यह यह तुम्हें कहां से मिला यह तुम्हेरे सास की कमरे में था
12:18कोई भी कीमती चीज मैं कहीं से भी चुरा सकता हूँ
12:21मुझे तुम्हारी इस कैद खाने वाली जिंदिगी के बारे में पता चला
12:25सबसे जो आपको पसंद है वो चीज आपको लुटाता जाओ
12:29और यह रहा आपका कीमती हार
12:31तुम्हें कैसे पता की यह मेरा पसंदी दाहार है यह भी इतना खूबसूरत है जितनी की आप
12:40यह दर्वाजा किस ने खुला
13:01माजी माजी जल्दी आए यह मैने चोर को फकड़ लिया जल्दी आए यह माजी यह सब पैसे जोएलरे
13:24बदमाश हमारी सारी जोलरी चोरी करके भाग रहा था
13:27शुकर है कम से कम ये तो मिल गया
13:30भगवान का शुकर है चलो अंदर चलो
13:32चलिए माजी
13:34चलो
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