00:00क्या ज़रूरी ही है पटा के फोड ना दिली में?
00:07पिकोज कहीं नगे आप देखो ऐसे हमारे पास
00:10Noise, Pollution Rules 2002 भी है, Government of India के पास जो फ्रेम्ड है
00:13मतलब ये Health जो है, स्वास्त जो है एक बहुत important factor
00:17of fundamental मौली का दिकार है, स्वास्त का
00:19अगर मैं पटाके फोड रहा हूँ तो सिरफ मैं अपने आपको
00:21enjoy करने के लिए दूसरों को तो प्रावलम क्रेट कर रहा हूँ
00:24pollution क्रेट करके, sound क्रेट करके
00:26तो ये सब चीजों के लिए law एकदम स्ट्रिक्ट है
00:29कि पटाके जो है एकदम नहीं है, नहीं जरूरी है
00:32और इसको completely ban कर दिया है, कि हिंदू धर्या में तो थोड़ा से ये, उसमें इंफ्रेंट में में फोकस है
00:38कि जो है right to life मतलब completely allow कर दे मैस वाइट की दो गंटे के लिए जला लो
00:43विकास जहां सी ये permission मिले तो वो दो गंटे नहीं पूरी राध चलेगी
00:47तो कुछ न कुछ ही इस पे बहुत एक्टम बीप अनेलिसिस किया जाएगा नमस्कार आप देख रहे हैं वन इंडिया में हूं श्रिविंद गौर्ड और आज एक और मामला सुप्रीम कोर्ट में है
00:55से को होगा तो कहीं न कहीं आगे चल कर उसको पूरे देश में हो लेकिन खास बात दिल्ली की में पर हम
01:09पर कणे के लिए के लिब सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और चेंगे कि हमें कुछ इम्म सुपरीम कोर्ण
01:14की इजादत दी जाए हमारे साथ सुप्रीम कोट के अधिभक्ता है उनी से जानेंगे कि अक्चुली हुआ क्या किस तरह की बहस हुई और क्या मामला हुआ क्या नाम है सब्सक्राइब आप जो आज पूछ रहे हैं कि दिल्ली चीफ मिनेश्टर राइटली अक्रॉस दा कंट्र
01:44उसके साथ सुप्रीम कोट आई थी दिल्ली गौप्ता है ऑफिशली ऑफिशली मतलब की ओन रिकॉर्ट गौवर्मेंट के साइट से स्टेट्मेंट जारी करती है कि हम दिल्ली में चाहते हैं कि दो घंटे अटलिस पटाके अलाव किये जाए सुप्रीम कोट के दुआरा वि
02:14की पर्मिशन्स दे दो तो देट विड़ भी मच कल्चरल मतलब हमारे एक कल्चर जो है हिंदु धरम में मतलब खुशी के साथ पटाकों के साथ सेलिब्रेशन करना तेभार का स्री राम जो है आते हैं उद्ध्या इतने सालों बाद तो वह सब एक कल्चरल इशू को मतलब प
02:44इंटरीम का मतलब होता है कि विकास दिवाली इस वेरी नेर बाए 20 अक्टरबोर को दिपावली है तो एक कुछ मतलब उस तरह का क्योंकि देखो जो भी जज्जमेंट आएगा ये तो लाइफ टेम के लिए हमेशा के लिए अक्रॉस दे कंट्री फिक्स रहेगा बैंडिंग
03:14दार पर होगा अच्छा ऐसे पूस्ताओं चौकी आप युवा भी है साथ-साथ गंभीरता से कानून को भी समझ रख रहे हैं तो यह जो जैसे कई लोग कहते हैं भी दिपावली पटाके बढ़ाना क्या जरूरी है इसके बगर दीपावली नहीं बनती यह भी एक बात है त
03:44है कि आपका सवाल जरूरी ही है पटाके फोर्णा दिली में ऐसे हमारे पास नौइस पॉलिशन रूल्स 2002 भी है गवर्मेंट ऑफ इंडिया के पास जो फ्रेम्ड है कि साधी जो है उसमें दस बजे रात के बाद व्यूजिक सिस्टम आप लाव नहीं करते हैं क्योंकि राइ
04:14तो सिरफ मैं अपने आपको इंजॉय करने के लिए दूसरों को तो प्राबलम क्रेट कर रहा हूं पॉलिशन क्रेट करके साउंड क्रेट करके तो यह सब चीजों के लिए लौ एकदम स्ट्रिक्ट है कि पटाके जो है एकदम नहीं है नहीं जरूरी है मतलब और इसको कम्प
04:44कि यह तो ठीक है आप सब लोग काभी प्रैक्टिकल जानते क्योंकि आप कानून से हरतने केस भी आपके पास आते हैं जब हम अभी था बिल्कुल बैन था यह ताकि भी चलेगा ही नहीं तो रुका हुआ था अब सवाल यह दो घंटे का दिया जाएगा प्रैक्टिकली कितन
05:14लोग फोड़ते हैं मतलब इतना होता है कि मतलब सफोगेशन होने लगती है अगर अगर हो भी जाता है कि दो गंडे के लिए तो एक लोगों को एश्ट्रा एट्ज मिल जागा कि वाई हमें तो गौर्रमेंट ने बोला और यह जब तक टाइम फिक्स नहीं होता है कि आपकी
05:44महाल में तो उन्हें देखा कई मेरे साथ ही अच्छे थे जो यह मसाला बगएरा इस तरहीं तो बहीं रख लिए तो अंदर है नहीं आप उसमें कह दिया जा वही आप सी इंटरवल में यह खा सकते हैं तो मेरा कहने कर दो गंटे के बात हो जाएगी तो आप बिल्कुल सही क
06:14में फोकस है कि जो है राइट टो लाइफ मतलब एक अधिकार है इस समय जो एक महाल और जो सोसल मीडिया और यह तमाम लोग खुल के भी आने लगें कई लोग बोलने ही लगें मीडिया में भी वाकाइदा में इस्टी मीडिया में भी बात होने लगी है लोग चैनल पर बै�
06:44उन्हीं को यह देना है तो यह कितना अलग साहल है कि उन्होंने रिजर्व के लिए रिजर्व का मतलब क्या समझाई दर्सकों को मरे देखिए जब को कोई इशू होता है तो उस पे दोनों साइट से प्रपर बहस हो जाती है जब कोट पूरी तरह से दोनों का पक्ष शुन �
07:14एक्सपिरेंस मतलब जो लग रहा है जज के साब से कि वह इंट्रीम रिले कुछ देना मतलब की दीपावली से पहले बहस पूरी हो गई बहस पूरी हो गई और इसको जब नहीं आ जागा तो मुझे लगता सीजाई को संदर यह से भी टिपड़ी मिलेगी सुनने को वह तो स
07:44था इक टाइम मतलब पान दिन दस दिन जो अपना पूरा तयार कि उन्हें जजमेंट लिखना होता है सारे चीज सारे चीज कियोंकि जो भी वो कहते हैं और काल के हर जगा हो अपलाई होने वाला हर श्टेट में हर जगए बहुत कि इस तरह के मामलों पर दिल्ली सरकार का भ
08:14इस तरह की बातों से कुछ ऐसा आसा मुझे लह रहा है मैं हलागी बहुत समझ नहीं रखता हूं कानून की आप बतौर प्रैक्टिस से कैसे देखते हैं कि दो घंटे का दार होई जाएगा
08:22मतलब प्रैक्टिकल नहीं है कि वह कंप्लेटली अलाव कर दे मैस वाइट की दो घंटे के लिए जला लो जहां से यह परमेशन मिली तो वह दो घंटे नहीं पूरी रात चलेगी तो कुछ ना कुछी इस पे बहुत एकदम डीप अनेलिसिस किया जाएगा और सिरफ उनरेबल �
08:52तो यह सुप्रीम कोट के अदिभकताओं की राय थी उनके अनुवफ से हमने समझने की कोशिस करी कि यह अभी जो बहस हुई है इसका क्या मतलब है और कुछ प्रैक्टिकल भी सोची चुकि आप दिल्ली में रहते हैं तो अगर दो घंटे का परमीशन मिलती है तो कितना यह
09:22इतना है सुप्सक्राइब सप्सक्राइब साथ यूण वन इस
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