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वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने मतदान के संवैधानिक अधिकार पर अहम टिप्पणी की है। हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत मिले वोटिंग के अधिकार से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि अगर किसी प्रक्रिया से बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित हो जाएं तो ऐसी प्रक्रिया संविधान का उल्लंघन होगी। जस्टिस भुइयां ने अनुच्छेद 325 और 326 का उल्लेख करते हुए सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के महत्व पर भी जोर दिया।

Amid the ongoing controversy over the Special Intensive Revision (SIR) of electoral rolls, Supreme Court Justice Ujjal Bhuyan has made important remarks on the constitutional right to vote. Speaking at an event in Hyderabad, Justice Bhuyan said that the voting right guaranteed under Article 326 of the Constitution cannot be interfered with. He said that if any process results in a large number of Indian citizens being deprived of their right to vote, such a process would violate the Constitution. Justice Bhuyan also referred to Articles 325 and 326 and highlighted the importance of universal adult suffrage. His remarks come as several petitions challenging the SIR process are pending before the Supreme Court.

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00:00वोटर लिश्ट के SIR को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोट के जज जस्टिस वो जुल भुईया की
00:05टिपड़ी सामने आई है।
00:06हैदराबाद में कायकर्म के दोरान उन्होंने कहा कि समविधान के अनुच्छे 326 के तहट मिले मद्दान के अधिकार से किसी
00:13भी तरह की छेड़ छाड़ नहीं की जा सकती।
00:15उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में भारतिय नागरिक अपने वोट देने के अधिकार
00:21से वंचित रह जाते हैं तो यह ऐसी प्रक्रिया समविधान के खिलाप होगी।
00:25उनकी टिपड़ी ऐसे वक्त में आई है जब SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई आचकाएं लंबित हैं।
00:55326 के तहट मिले वोटिंग के अधिकार से कोई भी छेड़शार नहीं कर सकता।
01:01उन्होंने कहा कि एक नागरिक का वोटर होना और वोट डालना बेहत अहम है।
01:06यह सुतंत्र और निस्पक्ष चुनाओं की न्यू है।
01:09Representation of People Act 1950 की धारा 22 किसी वोटर का नाम वोटर लिस्ट हटाने की अनुमती देती है।
01:16लेकिन यह तभी हो सकता है जब उस वोटर को सुनवाई का मौका दिया जाए।
01:21अगर किसी शक्स का नाम एक बार वोटर लिस्ट में शामिल हो गया है तो बिना उसके मर गए उसका
01:27नाम बिना नोटिस और सुनवाई के वोटर लिस्ट से बाहर नहीं किया सकता।
01:31यूपी सुपरीम कोर्ट एक केस में 2013 में ऐसा फैसला सुनाया कि वोट देने का अधिकार प्रिविलेज नहीं है।
01:38भारत में भी इस्थिति अलग नहीं है। भारत में भी किसी के वोट देने के अधिकार चिनाने जा सकता।
01:44यह ऐसा होगा जैसे शरीर से आत्मा निकालनी गई हो।
01:48जशिश भुया ने मद्दान के अधिकार के महत्य को समझाने के लिए बहुत कड़ी उकमा का इस्तमाल किया।
01:53उन्होंने कहा कि किसी भारतिय नागरिक को उसके वोट देने के अधिकार से वन्चित करना सरीर से आत्मा निकालने जैसा
02:00होगा।
02:01उन्होंने सम्विधान के अनुचेद 325 का भी जिक्र किया, उनके मुताबिक इस अनुचेद में लोकसभा या भी किसी भी राज्य
02:08विधान सभा के चुनाओं के लिए हर छेत्रे निर्वाचन छेत्र में एक सामान मद्दान सूची की बात कही गई है,
02:15साथ ही किसी ब्यक्ति को
02:16कि सिर्फ धर्म, नस्त, जाती या लिंक के आधार पर उस मद्दान सूची में सामिल होने से आयोग नहीं ठहराया
02:23सकता, यानि जिस्टिस भुईया ने अपनी टिपड़ी में मद्दान सूची और मद्दान के समवैधानी के अधिकार के बीच के संबंध
02:30को रेखा अक्मित क
02:31लोगों का नाम वोटर लिस्ट से हटाये जाने को गलत बताते हुए जश्टिस भुईया ने कहा कि भारती समविधान नागरिकों
02:38को दो वर्ग बनाने की अनुमती नहीं देता है, एक वर्ग वोटिंग अधिकार वाला और दूसरा वर्ग बिना वोटिंग अधिकार
02:44वाला �
02:45नहीं हो सकता, कोई प्रक्रिया जो नागरिकों को बिना वोटिंग अधिकार वाला बताती है, वा मेरी राय में समविधान के
02:51अनुछे 14 और 226 का उलंगन होगा, अगर कोई प्रक्रिया ऐसा करती है और अपने ही देश में लोगों को
02:58सेकंड क्लास नागरिक बनाती है, तो व
03:14गौहार्टी में हुआ था, डॉन बॉसकों से हाई स्कूल की, गौहार्टी से स्कूली सिख्छा ली, क्रोडिमल कॉले से बीए की
03:20पढ़ाई की और गौहार्टी के गौहार्टी के गौहार्टी के गौहार्टी से ललम की डिगरी उन्होंने हासिल की, गौहार्टी हाई कोट
03:27में वकालाश शुरू की करीब 16 साल तक आयकर रुखा के अस्थाय वकील रहे
03:311905 में जूनियर स्टेंडिंग काउंसिल के रूप में काम शुरू किया
03:352011 में असम के अत्रिक्त एड़ोकेट जनरल बने
03:382023 में सुप्रीम कोर्ट जज के लिए सिफारिश हुई
03:41और 14 जुलाई 2023 को सुप्रीम कोर्ट के नयाइधिस नियुक्त हुए
03:46फिलहाल S.I.R. को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कानू लिडाई जारी है
03:49और इस भी जश्टिस उजुल भुया ने मद्दान के समवैधानिक अथिकार की एहमियत पर जोड़ दिया है
03:55अब इस मामले में आगे होने वह नियाई कारवाई पर सभी की नजर रहेगी
03:59फिलहाल के लिए बस इतना ही बाकी अपडेट लिए बने रहे है वन इंडिया हिंदी के साथ

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