00:03इंद्रा एकाधशी का व्रत अश्विन माज के क्रिश्न पक्ष की एकाधशी दिथिgoing करते हैं।
00:08इस दिन भगवान विशन की पूजा करने का विधान है, वहीं पितर पक्ष के दौरान आने वाली इस एकाधशी का
00:14महात्मित पद्म पूराण में भी बताया गया है।
00:16मानेता है कि इंद्रा एकादशी वरत श्रद्धा पूर्व करने से वरती के साथ साथ पित्रों को भी इसका फल मिलता
00:23है।
00:23इस दिन विधी विधान से वरत और श्री हरी की पूजा करने से पित्रों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
00:29ऐसे में आईए जानते हैं पद्म पुरान में अश्विन कृष्ण दश्मी से लेकर द्वादशी टिती तक इंद्रा एकादशी की क्याविधी
00:37बताई गई है
00:37वरत कैसे करें, वरत में क्या खाएं क्या ना खाएं, साथी पूजा करने का सहीनियम क्या रहेगा
00:43ब्रती को अश्वन क्रिश्न दश्मी तिथी के दिन सुब़ जल्दी उठकर स्नानादी से निवरत्त होकर मध्यान काल में स्नान दोबारा
00:51करना होगा और एक समय भोजन करना होगा
00:53रश्मी की दिन से ही सात्वित भोजन शुरू करे और ब्रह्मचर का पालन करे इस दिन रात्री में भूमी पर
00:59सोने का विधान है
01:00सुर्यदे से पहले उटकर दातुन करके मुँ साफ कर ले और स्नानादी से निवरत्त होकर साफ वस्त्र पहन ले
01:07अब वरत का संकल पले इस दिन सवेरे विष्णुजी की विधिवत पूजा करे मध्यान काल में पित्रों की प्रसनता के
01:14लिए शालिग्राम श्रिला के सामने विधी पूर्वक्ष राद्ध करने का विधान है
01:19साथी दक्षणा से ब्राम्भनों का सतकार करे और उन्हें भूजन करे पद्मपुरान के अंसार पित्रों को दिये अन्नमय पिंड को
01:27सुंग कर गाय को खिला दे फिर धूप दीप गन दादी से भगवान विष्णु की पूजा कर दे रात्री के
01:33समय श्री हरी के समीप जाग
01:47नहीं तो सो कर जल्दी उठ जरूर जाएं पूजन के बाद ब्राम्भनों को भूजन करें और फिर भाई बंदू नाती
01:54पुत्र आदी परिवार के साथ स्वयम मौन रहकर भूजन करें इस विदी से श्रद्धाक भाव के साथ इंद्रा एकादशी कवरत
02:01करने से पित्रों को
02:02मोक्ष मिलता है और भगवान विश्णु के वैकुंड में आपको भी स्थान मिलेगा अब सवाल यह उठता है कि इस
02:09दिन क्या खाएं और क्या नहीं खाएं सबसे पहले तो इस दिन तुलसी दल ना तो तोड़ें और ना ही
02:15चबाएं इस दिन भूल कर भी व्रती और व्रती क
02:19के परिवारजनों को चावल ग्रहन नहीं करना चाहें वैसे तो इस व्रत को फलहार रखते हैं ऐसे में सुब़ पूजा
02:26के बाद आप फलहार ग्रहन कर सकती हैं पूजा से पहले कुछ भी ना खाएं न पिए वह हैं शाम
02:33की पूजा के बाद ही दूसरी
02:35बार फलहार ग्रहन करना चाहिए बात करें पूजा मुहुरत की तो इस दिन सरवार्त सिद्धी योग और अभिजीत मुहुरत बन
02:45रहा है जहां सरवार्त सिद्धी योग सुबच 6 बचकर 17 मिनट से लेकर रात 10 बचकर 17 मिनट तक रहेगा
02:52तो वहीं अभिजीत मुहुरत 11 बचक
03:05की तो 7 अक्टूबर दिन बुद्वार को किया जाएगा जिसमें सुबह 6 बच कर 16 मिनट से सुबह 8 बच
03:12कर 49 मिनट तक का समय है
03:16फिलहाल इस वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक और शेयर करें साथी चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूले