00:02हिंदु धर में बहुला चौत या बहुला चतुरती का वरत माताओं के लिए खास महत्वर रखता है।
00:58जर्मा को अर्ग देकर वरत खुला जाता है।
01:00खार भूका शेर आ गया। शेर बहुला को देखकर धाड़ा और उसे अपना शिकार बनाने के लिए आगे पड़ा।
01:06बहुला डर गई लेकिन उसने हिम्मत जुटा कर शेर से कहा है वनराज मेरा एक छोटा सा बचड़ा है जो
01:11अभी बहुत भूका है और आश्रम में मेरा इंतिजार कर रहा है।
01:14क्रिपया आप मुझे अभी जाने दें मैं अपने बचड़े को दूद पिला कर और उसे समझा कर आपके पास वापस
01:20आ जाऊंगी तब आप मुझे खा कर अपनी भूक मिटा लेना।
01:23शेर ने हसते हुए कहा तुम मुझे मुर्क समझती हो एक बार प्राण बच जाने के बाद भला मौत के
01:28मुझे कौन वापस आता है।
01:30बहुला ने अपने सत्य और धर्म की कसम खाई और वचन दिया कि वो जरूर लोटे की। बहुला की आँखों
01:35में सच्चाई देखकर शेर ने उसे जाने दिया।
01:38बहुला दोड कर नंदगाओं पहुँची उसने अपने बचड़े को पेट भर दूद पिलाया। उसे खोब प्यार किया और कहा कि
01:44अपसे तुम्हें अपना ध्यान खुद रखना होगा।
01:46सभी को विदा कहकर बहुला अपने वचन के मताबिक वापस उसी जंगल में शेर के पास पहुँच गई।
02:16कि आज के दिन जो भी माता तुम्हारी पूजा करेगी और इस कथा को सुनेगी उसके संदान हमेशा सुरक्षित रहेगी
02:23और उसे कभी भी कोई कच्ट नहीं होगा।
02:46कि एः झाओने दयायोंग आहीं होगा।।