00:06जब पूरी दुनिया इंजीनियरिंग के डिगरी के बाद नौकरी के सपने बुन रही थी, तब उडीशा का एक ही उवा
00:12अपने सपनों को पानी में तैराना सीख रहा था।
00:16किताबों और क्लासरूम के बीच इस छात्र ने ऐसा रास्ता चुना जिसने उसे कम उम्र में ही आत्म निर्भर बना
00:23दिया।
00:24ये कहानी है जुनून, जिद और जजबे से अपनी अलग पहचान बनाने वाले जगननाथ कर की।
00:32उडिशा के गजनाम जिले के चकराड़ा गाउं का रहने वाला सेकेंड इयर बीट एक छात्र जगननाथ कर।
00:39जब कॉलिच से लोटता है तो उसका अगला ठिकाना कोई कैफे या कोचिंग नहीं बलकि उसका अपना फिशफाम होता है।
00:47यहां हर तालाब, हर मचली और हर छोटी बड़ी गतिविधी पर उसकी पैनी नजर रहती है।
00:54हर दिन सिर्फ 30 मिनट इन मचलियों को देखना भी तनाव को कम कर सकता है और मन को सुकून
01:00दे सकता है।
01:01इस कहानी की शुरुवात हुई एक प्रदर्शनी से, जहां पहली बार जगनाथ ने देखा कि रंग बिरंगी मचलियां सिर्फ एक्वेरियम
01:10की शोभा नहीं, बलकि लाखोर रुपे का कारोबार भी बन सकती है।
01:15यही एक पल उसकी जिन्दगी का टर्निंग पॉइंट बन गया। उसने ट्रेनिंग ली, सीखा और फिर सपनों को हकीकत में
01:24बदलने का सफर शुरू कर दिया।
01:26आज उसके फार्म में गोल्ड फिश, गप्पी, मॉली और स्वार्टेल जैसी आकरशक प्रजातियां पाली जा रही है।
01:57जब जगनाथ कॉलेज में होता है, तब उसका छोटा भाई आयोश सुभाशा मचलियों को खाना खिलाता है। तलाबों की देखभाल
02:06करता है और अपने बड़े भाई के सपने को तूटने नहीं देता।
02:26खीच लिया है। क्रिशे विज्ञान केंद्र यानी केवीके ने ना सिर्फ उसे तकनीकी प्रसिक्षन दिया, बलकि आर्थिक सहायता दिलाने में
02:36भी मदद की।
02:37जो सफर सिर्फ पाच यूनिट से शुरू हुआ था, वो आज 20 यूनिट तक पहुत चुका है। अब लक्ष है
02:45इसे वन स्टॉप एकवा शॉप में बदलना।
03:01झालो
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