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  • 4 weeks ago
ओडिशा के गंजाम जिले के बीटेक छात्र जगन्नाथ कर ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ सजावटी मछली पालन शुरू कर युवाओं के लिए नई मिसाल पेश की है. एक प्रदर्शनी से प्रेरित होकर उन्होंने प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली और ECRICC योजना के तहत आर्थिक सहायता से अपना एक्वा फार्म स्थापित किया.आज वे गोल्डफिश, गप्पी, मॉली और स्वॉर्डटेल जैसी कई प्रजातियों की सजावटी मछलियां पाल रहे हैं. उनकी मेहनत से कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) भी प्रभावित हुआ है और अब उनके प्रोजेक्ट को विस्तार देने के लिए तकनीकी सहयोग कर रहा है. परिवार के सहयोग से जगन्नाथ पढ़ाई और कारोबार दोनों को सफलतापूर्वक संभाल रहे हैं. उनकी सफलता युवाओं के लिए स्वरोजगार और कृषि आधारित स्टार्टअप का प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है.

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00:06जब पूरी दुनिया इंजीनियरिंग के डिगरी के बाद नौकरी के सपने बुन रही थी, तब उडीशा का एक ही उवा
00:12अपने सपनों को पानी में तैराना सीख रहा था।
00:16किताबों और क्लासरूम के बीच इस छात्र ने ऐसा रास्ता चुना जिसने उसे कम उम्र में ही आत्म निर्भर बना
00:23दिया।
00:24ये कहानी है जुनून, जिद और जजबे से अपनी अलग पहचान बनाने वाले जगननाथ कर की।
00:32उडिशा के गजनाम जिले के चकराड़ा गाउं का रहने वाला सेकेंड इयर बीट एक छात्र जगननाथ कर।
00:39जब कॉलिच से लोटता है तो उसका अगला ठिकाना कोई कैफे या कोचिंग नहीं बलकि उसका अपना फिशफाम होता है।
00:47यहां हर तालाब, हर मचली और हर छोटी बड़ी गतिविधी पर उसकी पैनी नजर रहती है।
00:54हर दिन सिर्फ 30 मिनट इन मचलियों को देखना भी तनाव को कम कर सकता है और मन को सुकून
01:00दे सकता है।
01:01इस कहानी की शुरुवात हुई एक प्रदर्शनी से, जहां पहली बार जगनाथ ने देखा कि रंग बिरंगी मचलियां सिर्फ एक्वेरियम
01:10की शोभा नहीं, बलकि लाखोर रुपे का कारोबार भी बन सकती है।
01:15यही एक पल उसकी जिन्दगी का टर्निंग पॉइंट बन गया। उसने ट्रेनिंग ली, सीखा और फिर सपनों को हकीकत में
01:24बदलने का सफर शुरू कर दिया।
01:26आज उसके फार्म में गोल्ड फिश, गप्पी, मॉली और स्वार्टेल जैसी आकरशक प्रजातियां पाली जा रही है।
01:57जब जगनाथ कॉलेज में होता है, तब उसका छोटा भाई आयोश सुभाशा मचलियों को खाना खिलाता है। तलाबों की देखभाल
02:06करता है और अपने बड़े भाई के सपने को तूटने नहीं देता।
02:26खीच लिया है। क्रिशे विज्ञान केंद्र यानी केवीके ने ना सिर्फ उसे तकनीकी प्रसिक्षन दिया, बलकि आर्थिक सहायता दिलाने में
02:36भी मदद की।
02:37जो सफर सिर्फ पाच यूनिट से शुरू हुआ था, वो आज 20 यूनिट तक पहुत चुका है। अब लक्ष है
02:45इसे वन स्टॉप एकवा शॉप में बदलना।
03:01झालो
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