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  • 5 months ago
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Transcript
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01:08लल्लु उन गन्य पर दूल जमी है साफ कर आज शहर के कलेक्टर साफ भी आ जाए तो कोई हरानी
01:14की बात नहीं है हमारे रस की खुश्बू हवा में ऐसे तेर रही है देखो वो बादर भी रस पीने
01:20के लिए नीचे उतर रहे है जैसे
01:24साफ कलेक्टर साफ आए ना आए पर वो शुकला जी जरूर आ रहे है उनके आने का मतलब है कि
01:29वो गिलास के रस से जादा हमारे दिमाग का धही करेंगे उनकी चाल तो देखिये पिलकुल 10 रुपे के मुड़े
01:35तुड़े नोट की तरह तेड़ी मेड़ी है
01:39शुकला जी गाव के एक रिटाइट पोस्ट मास्टर थे उन्हें दुनिया में अपनी सेहत जेब में रखे दसकी नोट से
01:44ज़्यादा कुछ प्यारा नहीं था
01:49उनके साथ पंडित भी था जिसे मुष्ट में कोई भी चीज मिल जाए तो वो नहीं चोड़ता था
01:54उसका गमचा हर दम कुछ न कुछ बानने के लिए तैयार ही रहता था
02:02अरे देवदत क्या बात है आज तुमारी महारानी कुछ अलगी राग गा रही है
02:06गन्ना ठीक से साफ किये होना आजकल मेरा गला खराब है फिर से दर्द नहीं होना चाहिए अगर हुआ तो
02:12दवा के पैसे तुम ही दोगे समझे
02:16शुकला जी गला खराब हो तो गरम पानी पीते है गन्ने का रस नहीं देवदत मेरे गिलास में थोड़ा अद्रक
02:22और पुदिना ज्यादा डालना हाँ बर्फ के टुकुडे कम रखना क्योंकि बर्फ के रस से मात्रा कम हो जाती है
02:29मुझे शुद्ध रस चाहिए दस रुपे
02:31दे रहा हूं तो समझो अपना खोन दे रहा हूं पंडित जी आपके दस रुपे में अगर मैं इतना अधरक
02:37पुदिना डालू तो मेरे पास गन्ने की फाकी नहीं बचेगी आप रस पी रहे है या मेरी जाइदात अपने नाम
02:42करवा रहे है लल्लू गन्ना डाल लल्लू ने ह
03:25पुरानी गलती की वजे से ये किमत आज भी दस रुपे की है
03:30अतीत की एक जलक देवदात पहले पटना में बड़ा व्यापार करना चाता था जब उसने एक पुरानी मशिन खरी दी
03:38तो बेशने वाले नेक शर्त रखी ये मशिन बहुती भावूख है ये सिब 10 रुपे का नोट देखकर ही चलती
03:45है अगर तुम लालच में कीमत बढ़ा�
03:49तो ये रस के बदले काला गरिस उगलेगी देवदात ने तब यकिन नहीं किया उसने ट्राइल के लिए 20 रुपे
03:57का बोड लगा दिया बस फिर क्या था मशिन से रस निकलना बंद हो गया और अंदर का सारा गरिस
04:03देवदात के चरह पर आगिरा तब देवदात डर गया और �
04:30ॐ अपनी पुरानी साइकिल पर था
04:37लेकिन टशन ऐसे दिखा रहा था
04:39जैसे प्राइवेट जेट से उत्रा
04:41उसके पीछे एक नोकर छाता पकड़े
04:43पसिने से तर बतर होकर दोड रहा था
04:48ए देवद्यूत मुझे एक लास दे
04:51पर याद रखना मेरे पास दस का नोट नहीं है
04:53मैं इसे पाच रुपे दूँगा
04:55क्योंकि मैं गाव का बड़ा अद्मी हो
04:57मुझे डिसकाउंट मिलना चाहिए
04:58वो इसे मेरी साइकिल तुमारी गाड़ी के पास खड़ी है
05:01इससे तुमारी दुकान की इज़द बढ़ जाएगी
05:05सहाब दस रुपे खुद में ही डिसकाउंट वाली कीमत है
05:08अब इसमें भी पाच रुपे इतने में तो मुझे गन्ने की लागत भी नहीं मिलेगी
05:12आप चाहे तो मैं अपने पसेने के कुछ बून दे रसमें मिला दू
05:16तुझे पता नहीं देवदाद
05:17मेरी इजद के आगे तेरा दस रुपे की क्या उकात है
05:20अगर पाच रुपे में गिलास नहीं भरा
05:22तो मैं भी तुमारे दुगा निया से हटवा दूँगा
05:24इस नीम के पेड़ की छाओ पर सिप मेरे साइकल का हक है
05:28अरे सहाब पाच रुपे में तो मशिन शायद आदी ही घुमेगी
05:32शाब आप पाच रुपे का रस पियेंगे तो आपकी इजद का कम हो जाएगी
05:36देवदाद को गुस्सा आया
05:38उसने मशिन के पास जाकर ललू को इशारा किया
05:41ललू ने गन्ये को आदा काट कर लगा दिया
05:44देवदाद ने हंडल को सिर्फ एक चकर गुमाया
05:48गिलाश में मुश्किल से तो चम्मच रस गिरा
05:50जो गिलाश के तल से भी ठीक से नहीं दिख रहा था
05:56यह क्या है यह तो गिलाश के नीचे भी नहीं दिख रहा है
05:59मुझे रुला रहे हो क्या?
06:01सहाव 10 रुपे में गिलास भरता है
06:045 रुपे में तो गिलास सिर्फ गिला होता है
06:06आपने कहा था
06:07यह आपके सम्मान सबसे ज़्यादा जरूरी है
06:09तो उसी सम्मान से अपनी प्यास बुजा लीजिए
06:12अगर आप रसकी उन्दों बुंदों को अपनी जीप पर रखेंगे
06:15तो अमरुद जैसी लगेगी
06:17आसपास के खड़े लोग हसने लगे
06:19शुकला जी ने अपनी डायरी में
06:215 रुपे के गनीत को नोट पर रख लिया
06:23दनीराम अपमानित मैसुस करते हुए
06:26अपनी साइकल चला कर मासे निकल गया
06:30थोड़ी देर बाद वहाँ पर नगर पालिका अधिकारी आया
06:33जिसका नाम बिहारी लाल था
06:35उसका पेट उसके शरीर से पहले
06:37गनी के मशिन के पास पहुँच गया
06:40उसे रिश्वत से ज़्यादा स्वादिष्ट भोजन का शोग था
06:46ए देवदात या नेम का पेड नगर पालिका का है
06:49या रेडिय लगाने के लिए पर्मिशन चाहिए
06:51और अगर पर्मिशन चाहिए तो मझे रोच पास गिलास रस मुफ में देना होगा
06:56वरना मैं अभी तुमारी मसिन को सील कर दूंगा
07:00सहाब 5 गिलास?
07:01हमारे साब का खुन पी लिजिए सहाब
07:03लेकिन 5 गिलास रस नहीं दे सकते
07:06हमारे साब के पास पर्मिशन तो नहीं है
07:08लेकिन भगवान का अशिरवाद जरूर है
07:11भगवान के आशिर्वा से चाला नहीं भर सकते देवदत, रेडी हटाओ, मैं अभी नोटिस लगाता हूँ, मेरी कलम की शाही
07:17से ज़्यादा अगर तुम्हार रस होगा, तभी मुझे शांती मिलेगी
07:21देवदत को एक तरकीव सुझी, उसने अधिकारी को मशीन के पास बुलाए
07:26अधिकारी जी, आप पाज नहीं दस गलास पीजे, लेकिन एक छोटीशी शर्थ है, अमारी मशीन की एक अजीब आदत है
07:33रस पीने वाला गिलास को हाथ से न पकड़े, वह सिधा मशीन से निकल कर अपने मुँ में गिरना चाहिए,
07:39तभी उस रस में म्यूनिसिपल पावर आईगा
07:42बिहारी लाल को या बाते बड़ी दिल्चस्पी लगे, वह बिना किसी गलास पकड़े, अपना मुँ खोल कर, नीचे बैट गया,
07:49मुँ खोले हुए, वह एक बड़ी मचली जैसा लग रहा था
07:53टेवदत ने ललू को आग मारे, ललू ने मशिन की रफ्तार अचानक बड़ा दी, रस सिदा अधिकारी के नाग आग
08:01और कानों में गिरा, लेकिन मुँ में एक बूंद भी नहीं गिरी, उसका पूरा चेरा गन्ये के रस से भीग
08:07गया
08:12अरे ये क्या है, मेरा पूरा चेरा रस से तर हो गया है, मैं अपने आखे भी नहीं खोल पा
08:16रहा हूँ, अगर चीटी आ गई, तो मुझे खा जाएगी
08:20अरे अधिकारी जी, आपका मुँ छोटा है और हमारी मशिन से निकलने वारा रस की दारा बहुत बड़ी है, दोनों
08:26का ताल में नहीं बेटा, शायद अगर आप रिश्वत मागना छोड़ दे, तो ये रस सिधा आपके मुँ में जाएगा,
08:32वह भी डिजितल तरीके से
08:33लोग तालिया बजाने लगे, बिहारी लाल अपनी कमीश से चेरा पोस्ते हुए, वहाँ से भाग खड़ा हुआ
08:44थोड़ी देर बाद एक चालाक व्यापारी आया, जिसका नाम बनवारी लाल था
08:50उसके हाथ में पुराणा तरोजू था, उसे हर चीज तोल कर लेने की आदत थी
08:56अरे देवदात, तुम दस रुपे में रस दे रहे हो ना, मुझे एक गिलास तोल कर दो, वह पूरे 250
09:01ग्राम होना चाहिए, एक ग्राम भी कम हुआ, तो पैसे नहीं दूँगा
09:05साब रस को तोलते हैं क्या, गिलास से मापा जाता है न, तराजू से नहीं, आप रस पिएंगे, या उसका
09:11सोना बनाएंगे
09:12यहाँ पार में बनोसा होना चाहिए, ललो, देवदत, तुमारी मशिन पूरानी है, वह सही से रस निकाल पा रही या
09:19नहीं, मुझे जानना है, अगर कम हुआ, तो तुम्हें जुर्वाना देना होगा
09:22देवदत्स मुस्कराया और बोला, ठीक है बनोरी लाल जी, वह सही करते है, देवदत्स ने तराजू उपर एक गिलास रखा,
09:30ललो न गन्ना डालकर मशिन घुमाई, रस गिरने लगा, तभी देवदत्स ने चालागी से तराजू के नीचे बर्फ का एक
09:37टुकडा, छुटा
09:49नहीं आया, वो हैरने से देखी रहा था कि बर्फ का टुकडा पिगल गया, गिलास रस से भर गया, लेकिन
09:56इससे पहले बनोरी लाल वजन देख पाता, पास में खड़ी एक गाय ने आकर, गिलास को मुँ मार दिया, सारा
10:07रस बनोरी लाल के कपड़ों पर चश्मों पर गिर �
10:13अरे मेरा चश्मा मेरा तराजू, सब रस में डोग गया, अरे देखा आपने, कुजरत को भी आपका तोलना पसंद नहीं
10:20आया, उस गाय को भी समझ में आ गया, कि आप धोकड़ी कर रहे हैं, अपना रस बचा न तोल,
10:26लेकिन दस रुपे तो देने ही पड़ेंगे, बनोरी �
10:29अरे लाल डर के मारे, दस रुपे देखकर अपना तराजू लेकर वहां से भाग गया, देवदत ने दस रुपे अपनी
10:35गुलक में डाल ली, शाम हो गई, धूप कम हो गई, देवदत ने अपनी मशीन का सुक्रिया आदा किया, उस
10:42मशीन ने आज सब की पोल खोल दीती,
10:48देखा शुकला जी, दस रुपे का रस से प्यास नहीं बुजाती, बल्कि घमंडी का घमंड और लाल जी की लालच
10:54को भी खुचल देती है, मेरी रेडी पर सब बराबर है, पाच रुपे वाले पाच रुपे का सम्मान और दस
11:00रुपे वालों को दस रुपे का रस,
11:02अरे सहाब हमारी मारानी को 10 रुपे के नोट से जो लगाव है
11:06वो करोड़ पतियों को भी नहीं होती
11:08हम 10 रुपे में ही बेचेंगे
11:10तब हमें मन के शांती मिलेगी
11:12शुकला जी जाते जाते बोले
11:14अरे देवदत तुमारा रस से जादा तुमारी बुद्धी माने मीटी है
11:17आज मेरे 10 रुपे की किमत वसुल ही
11:19कल फीर आओंगा
11:20लेकिन मेरे ग्लास में अधरक थोड़ा कम डालना
11:23देवदत मुस्कुराया
11:24हमेशा 10 रुपे ही रहेंगे शुकला जी
11:38सीख सत्य और इमानदारी के पेशे में कभी डर नहीं होता
11:42सामने वाला कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो
11:44अगर आपके कामे पवित्रता है
11:47तो जीत पक्की आग की ही होगी
11:49अत्यदीक लालज हमेशा नुकसान पहुचाती है
11:52जो पास है उसमें संतुष्ट रहना सीखना चाहिए
11:55दुसरों को निच्छा दिखाने वालों को
11:57कभे न कभी अपमान का सामना करना ही पड़ता है
12:00हमारा हुनर दुसरों को भला करता है
12:02तभी उसका सही फल मिलता है

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