00:02कौन मादा पिता पना चाहता है कि अपने बेकर को ऐसे करें
00:13क्या बताओ मैं बाब आपको कैसे लगता हो
00:18ऐसे पता नहीं हरीश जैसे कितने लोग पड़े हैं उनका भी कल्यान हो
00:26कि अब इंडिया में इच्छा मृत्यू लेना लीगल हो गया है
00:30एक 31 साल का लड़का जो 13 साल से कौमा में था सिरफ मशीन्स के सहारे जिन्दा था
00:36उसके माबाप ने सुपरीम कोट से कहा कि अब हमारे बेटे को इस जीवन से ही आजादी दे दीजिए
00:43और फिर सुपरीम कोट के फैसले ने पूरे देश को हिना दिया
00:4713 साल से कौमा में पड़े कि 31 साल के युवा
00:50हरीश राना जिनोंने ना कुछ बोला ना कुछ महसूस किया
00:54और सिरफ मशीन्स के सहारे जिन्दा थे
00:56और अब सुपरीम कोट ने एक फैसला दिया है
00:59जो इंडिया की लीगल और मेडिकल हिस्ट्री में माइल्स्टोन बने रहे है
01:04सुपरीम कोट ने हरीश राना को पैसिव उथनेसिया यानि इच्छा मृत्यू की इजाज़त दे दी है
01:10हरीश राना गाजियाबाद के रहने वाले हैं
01:13और 2013 में जब वो चंडिगट की पंजाब उनिवस्टी में बीटक कर रहे थे
01:17तब हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए
01:20इस आक्सिडेंट के बाद उनका पूरा शरीर में लखवा हो गया और वो कुमा में चले
01:24और तब से लेकर आज तक पूरे 13 साल हरीश वेंटिलेटर और फीडिंग ट्यूब के जहारे ज़ता थे
01:31डॉक्टर्ज ने उन्हें कौडरपलेगिया से पीडित बताया एक ऐसी कंडिशन जिसमें पेशिंट पूरी तरह दूसरों और मशीन्स पर डिपेंडिंट हो
01:40जाता है
01:40और रिकवरी की भी कोई उमीद नहीं होती है
01:43तेरा साल तक विस्तर पर पड़े रहने की वज़े से उनके शरीर पर गहरे बैचसोर्ज हो गए है
01:49कंडिशन लगातार खराब होती गई और फैमिली के लिए उन्हें इस हालत में देखना
01:55मेंटली और फैनांशली दोनों तरह से बहुत ही जादा मुश्किल हो गया
02:00इसी वज़े से हरीश के माबाप निर्मिला राना जी और अशोक राना जी ने सुप्रीम कोट जाने का फैसला किया
02:07और अपने बेटे के लिए इच्छा मृत्यू की परमिशन मांगी
02:11और अब सुप्रीम कोट की बेंट ने एम्स को ओर्डर दिया है कि हरीश राना का लाइफ सुपोर्ट स्टेप बाइ
02:17स्टेप रिमूव किया जाए
02:19और ये प्रोसेस इस तरह हो कि पेशन्ट की डिगनिती बनी रहे
02:23कोट ने कहा है कि लाइफ सुपोर्ट हटाने का फैसला दो चीजों पर डिपेंट करता है
02:28पहला क्या ट्रीटमेंट मेडिकली मीनिंग्फुल है या नहीं
02:31और दूसरा क्या ये patient के best interest में है इन दो चीजों पर Supreme Court फैसला लेता है
02:37यानि अगर किसी patient के ठीक होने की कोई possibility ही नहीं है तो doctor का फर सिरफ machines पर
02:43जिन्दा रखना नहीं रह जाता है
02:46Supreme Court ने अपने decision में गहरी बात भी कही उन्होंने Shakespeare के famous dialogue to be or not to
02:52be का जिकर किया
02:53और कहा इस बार courts को भी इस सवाल का जवाब गहराई में जाके ढूंडा पड़ा है
02:59अब यहां important बात समझना जरूरी है इंडिया में euthanasia के दो टाइप्स होते हैं
03:03पहला जहां passive euthanasia इसमें patient को जिन्दा रखने वाली treatments जैसे ventilator, feeding tube या medicines हटा दी जाती
03:11है
03:11डॉक्टर को injection या direct action नहीं देता और patient की death natural तरीके से हो जाती है
03:17और दूसरा है active euthanasia इसमें patient को जान बूच कर injection या medicine दे कर मौथ दी जाती है
03:24और इंडिया में active euthanasia अभी भी illegal है यानि जान बूच के को injection दे के आप patient को
03:30नहीं मालें
03:31passive euthanasia को पहली बार सुप्रीम कोट ने 2018 में legal माना था
03:35जो common cause नाम की NGO की petition पर कोट ने कहा था कि किसी इंसान को right to die
03:41with dignity सरूर मिलना चाहिए
03:44तो right to die with dignity का ही ये सवाल है और अब इस फैसले ने आने वाला इतिहास बदल
03:50दिया है
03:50आप देख रहे हैं One India मैं हूँ आख रूश काशिक
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