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  • 6 months ago
भारत का सनातन धर्म और इसकी परंपराएं हमेशा विदेशी लोगों को लुभाती रही हैं. इसी कड़ी में तुर्की की रहने वाली मार्गुरेट पुरी का नाम जुड़ रही है. मार्गुरेट टर्किश एयरलाइन्स में एयर होस्टेस की नौकरी करती थीं, लेकिन उन्होंने उस नौकरी को छोड़कर संन्यास ग्रहण कर लिया. अब वो पंच दशनाम आह्वान अखाड़े की संन्यासिनी हैं. मार्गुरेट पहली बार शिवरात्रि मेले में शामिल होने गुजरात के जूनागढ़ के भवनाथ मेले में आई हैं. उनका कहना है कि ईश्वर को पाने की चाहत ने उन्हें तुर्की से यहां खींच लाई.  बात पांच साल पहले की है, मार्गुरेट बतौर टूरिस्ट इंडिया आईं थीं. फिर साल 2025 में एक टूरिस्ट के रूप में वो आखिरी बार भारत आईं. महा कुंभ मेले ने उनकी दुनिया ही बदल दी, जहां उन्होंने सभी भौतिक इच्छाओं, पावर और दौलत का मोह त्याग दिया और संन्यासिनी बन गईं.  टूरिस्ट के रूप में मार्गुरेट सनातन धर्म और उसकी परंपराओं इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने धर्म और संन्यास का रास्ता अख्तियार कर लिया. भले ही उन्होंने तुर्की में जन्म लिया, लेकिन दिल से खुद को हिंदुस्तानी समझती हैं. महाकुंभ मेले के बाद, महाशिवरात्रि मिनी कुंभ उनका पहला अनुभव था और यह अनुभव उनके लिए यादगार बन गया है

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