00:00झाल झाल झाल झाल
00:31तुम्हारे तीरों की धार देखी जाएगी
00:38जब वजय तक अमुकुट पहना जाएगा
00:41तब हर आग को ये माथा ही दिखेगा
00:44तोड़ा सजा रहा तो पुरा क्या है
00:47इतना एंकार
00:50एंकार निए
00:52विश्वास
00:54उतना ही विश्वास
00:56जितना रत की लगाम हाथ में लेती हो ये तुम्हे था
01:00मेरी जीत तो पक्की थी
01:01मेरे मित्र जुत है मेरे साथ
01:05मेरी भी जीत पक्की है
01:07मेरी मित्र एक कुशल सार्ती है
01:09वो मेरे हर तीर को अपने लक्ष तक
01:13अपनी प्रात्ना उसे पहुचाएगी
01:17और मुझे पुरा यकीम
01:19वो पहले ईश्वर के खुब हाद जोड़ेगी
01:25मैंने कोई हाथ वाथ नहीं जोड़े
01:27अच्छा
01:28मेरी हाथ में पूजा का दागा कैसे
01:33आम
01:34वो तो बस ऐसे
01:41जीत जाओंगा तो जो माँओंगा वो मिलेगा
01:45मैं शर्ट नहीं लगाती
01:51लखरेग इतना अच्छा राजक्मार में उतला
01:54सोच लो
01:56कुझ हाथ से अफसर निकाना जाए
01:58शुभो मंगलो
02:11स्वागत है
02:12आई
02:14आई
02:15आई
02:15आई
02:16आई
02:23आई
02:27राजकुमार दुर्योधन
02:29रंग भूमी में पधार रहे है
02:50राजकुमार अर्जुन
02:51रंग भूमी में पधार रहे है
02:54राजकुमार अर्जुन की राजकुमार अर्जुन की राजकुमार अर्जुन की राजकुमार अर्जुन की राजकुमार अर्जुन की राजकुमार अर्जुन की राजकुमार अर्जुन
03:08की राजकुमार अर्जुन की राजकुमार अर्जुन की राजकुमार अर्जुन की �
03:14कि आपना कि उना एंड, मैंने पुछिस किया एंड, कर दोदा है कि आपना कि इना प्रफ एंड कि आप़ाद।
03:47कि निसी चमक बरदाश्ट नी कर पए यहां जब मेरे तीरो की नोग कॉंदेगी तब क्या हाल होगा तुमारा अर्चुन
03:54अपनी सारी शक्तियां बाते बनाने में व्यर्थ करतों के ना तो दनुष की टो ना किची चाईगी तुमसे
04:17अर्चुन तुम्हें कुछ देना था तुम्हें कुछ देना था एग के यह रत्मय इस संसार में से पेखी है पाच
04:28अर्ट वात्व मिलके भी से तोड़नी सकते है
04:33कि कहते हैं यह रतने जिसके पास है न वो कभी नहीं हार सकता
04:48कि इसे संभाल लोगे न उसे कोई छू भी नहीं पाएगा
04:54हमारी बच्पन की मित्रता को इन दोनों नहीं आगे बढ़ा है
04:58अब तो मित्रता से बढ़के रिष्टे बनने है
05:30यहाँ बढ़के रड़के पास है
05:32अबहाँ ड़एफ दोनों नहीं है
05:49यहाँ तो मित्रता बढ़के रगल
05:52कि ऑन दोनों दोनों पास्थे आद्धाफेश
06:10कोड़ो और पांड़ो की युद्ध कोशल का प्रदर्शन शुरू हो रहा है
06:44सभी राजकुमार एक से बढ़कर एक है पर उर्वी इन में सर्वश्रेष्ट कॉन है इसका पैसला कैसी होगा
06:50समय जवाग देदेगा तुम बस देखती जाओ
07:02राजकुमार नकुल और सहदेव विजाई हुए और राजकुमार युदिश्धिर में अपने कौरव प्रतीजवंदी को परास्त किया
07:13राजकुमार भीम कौरव कुमार को पचाड कर मल्य युद्ध में विजाई हुए
07:20और अब आ रहे हैं राजकुमार अर्जुन अपनी धनुर्विद्या का प्रदर्शन करने
07:33प्रदर्शन करने
07:58कर दो
07:58कर दो
08:28कि अगल जाएंगे अपर नाएंगे लिए घूरी करता है
09:04शताल का जूल्टा अर्जून केंव
09:25सरश्रेष्ठ योद्धा हो शमा चाहूंगा गुरुदेव
09:51एग निर्जीव धाल जो ना ही अपनी साहेता कर सकती है
09:54ना ही पलटकर वार उसे भेद कर कोई अपने आपको श्रेष्ठ कैसे साबित कर सकता है
10:00सर्व श्रेष्ठ वो है जो दो श्रेष्ठ के बीच का मुकाबला जीते
10:06तो मेरी गदा अर्जुन के तीरों को चुनौती देती है वो मुझे छू कर दिखाए
10:20गवराई ये नहीं गुरु दुरों है वहाँ
10:23अर्जुन दुर्योधन मुकाबला तुमारे तीर और गदा के मद्धे होगा
10:29रक्त की एक भी बूंद ना बहे अन्यता चोट पहुचाने वाला इस रंग भूमी से बाहर होगा
10:35प्रदर्शन को युद्ध में ना बदला जाए
10:56प्रदर्शन को चाहर शोड़िया प्रदर्शन के वाला इसाइए
11:04प्रद्ड़्स को युद्ध में बुद्ध स्वार पंद गलबाः
11:04जाए
11:05इस प्रद्ड़िया लोग में इस भापता है
11:14फुड़ी जो रह में निए खुड़ी हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ
11:36कर दो बड़े पुछन धाज कर दो कर दो दो कर दो पूला सुछब कर दो दो तो तो पर
11:51दो कर दो दो रहां ये अगरे तक दोस्ता है
12:21लगता है तुम्हारे धनुष ने हार माननी है अनुष
12:25मेरी गदा से तुम्हारे तीर आख भी ना मिला पारे
12:37मेरे चर्णों में तीर चला शमा मांग रहे हो या अजिर्वाद
12:49अरे तीर राजकुमार अरजुन क्या कर रहे है
12:51राजकुमार अरजुन भूमियों पीर क्यों मानन
12:54भी आखे हाथ
13:17राजकुमार अरजुन की राजकुमार अरजुन की tents
13:23Rajkumar Arjun Khi!
13:25Rajkumar Arjun Khi!
13:26Rajkumar Arjun Khi!
13:45जुरुदेन बहीया
13:48आस्वी कार कीच है
13:53हाज सुविकार कीजे, जेश्ट.
13:57आज तो दुर्योदन की टे हैं.
14:00अर्जुन के बार्णों की काट इस दुनिया में सुर्ट तीन ही लोगों के पास है.
14:03एक तु भिष्मा पितावा, गुरुद्रोन और उनके गुरु परशुडा.
14:08और आज तुर्योदन को इन तीनों में से कोई भी मुप ने करा सकता है.
14:15अंतिम बार कह रहा हूं भाया, हार सुविकार कीजी.
14:43एक झाहे लाए लाए लाए ला में सितत है.
14:51अंतिमार काहूं अंतिमा भी में है.
15:09कर दो कर दो
15:38कर दो कर दो कर दो
16:00कर दो बौष्यक्त
16:03पोष्यक्त
16:04कर दो
16:06के दो
16:16कोष्यक्त
16:18यह गवाज कॉंडल, यह तो मेरा वही पुत्र, जिसे मैंने त्याग दिया था
16:59यह तो मेरा वही तो मेरा वही तो मेरा वही दिया था
17:33यवस्थरोगरमारी वायमत्यक्पा दुलजे
17:37सिल्दे शिल्दे सप्रुबरत शैर
17:41यवस्थरोगरमारी वायमत्यक्पा दुलंजे
17:51कौन हो तुम जिसने बिना अनुमती इस रंग भूवी में तीर चलाने का धुस्सा हस किया परिचेदो
18:01कर्ण
18:01कर्ण
18:03कर्ण
18:13कौन कर्ण
18:15कहां से माता पिता कुल जाती
18:23हर जुटी कुछ भी बोल रही है
18:25दुर्वासा रिशी ने तुझे किसी भी देव का आवाहन कर
18:28उनसे संतान प्राप्ति का वर्दान दिया है
18:31हाँ
18:31नई मैं नहीं मानती
18:33बिना परग कैसे कर लो विश्वास
18:35अरे तुम दुर्वासा रिशी के वर्दान पर संदे कर रही हो
18:39पता नहीं पर
18:40पर मन नहीं मानता कि ऐसे भी हो सकता है
18:43कर किसी का आवन
18:45फिर दूद का दूद और पानी का पानी हो जाएगा
18:47हट बावली
18:50यदि कोई देव आगे तू
18:51और वर्दान पूरा कर गे तू
18:54तो फिर कर ते रे छलावे पर विश्वास
18:57मैं तो नहीं करती
19:13ओम सुर्याए नमहा
19:15ओम सुर्याए नमहा
19:34दूर्वासा रिशी ने तुझे किसी भी देव का आवान कर
19:36उनसे संतान प्राप्ती का वर्दान दिया है
19:38नहीं, मैं नहीं माद दूद का दूद और पानी का पानी हो जाएगा
20:11दूर्वास
20:12संचुलाइन, वहाँ वहाँ, संचुलाइन, वहाँ, संचुलाइन, वहाँ, संचुलाइन, वहाँ, संचुलाइन, वहाँ, संचुलाइन, वहाँ, संचुलाइन, वहाँ, संचुलाइन, वहाँ, संचुलाइन, वहाँ, संचुलाइन,
20:39वहाँ, संचुलाइन, वहाँ, संचुला
20:42वर्दान अनुसार मैं तुम्हीं वीर कताती सुन्दर एवं अपराजै स्वन कवच कुंडल धारी पुत्री देता हूँ
21:06सभा तुम्हारे जवाब के प्रतीक्षा में है कर्ण
21:10सूथ पुत्र तुम्हारा जन तुम्हारा भाग लिख गया है कि तुम धनुष नहीं
21:14घोडों की लगाम पा
21:15तु सूथ पुत्र है यदि तुझे वीर रतापी बनना होता और तु सूथ पुत्र नहीं एक शत्र ये बनकर पहता
21:20होता
21:21सूथ पुत्र
21:23रक्त है यानि मनुष्य हूँ
21:26फनुष है यानि योध्ध
21:28मेरे बार्ण अपनी धार दिखा चुक है
21:30यानि अर्जुन को चनौती देने योग्य हूँ
21:32क्या इतना परियाप्त है
21:36नहीं है परियाप्त
21:38आग चिता से ली हो तो उससे मंदिर के दीप नहीं जलाये जाते
21:43जल पोखर का हो तो उसे गंगा जल समझ कर घर में छिड़का नहीं जाता
21:48भूमी पत्री ली हो तो उसमें खेती नहीं की जाती
21:51हर चीज का नियम होता है
21:54एक्षत्रियों को एक्षत्री ही चुनवती देने का अधिकार रख सकता है
22:00समाज के नियम समाज के रखवालों ने बनाए
22:02और प्रक्षिती ने हर बार तोड़े
22:05परना युद्ध अगर सिर्फ एक्षत्रिय का अधिकार होता
22:08तो औरों की बुजाओं में बल क्यों आता
22:12शिक्षा अगर सिर्फ एक वर्ग का अधिकार होती तो ईश्वर सब को बुद्धी और ज्यान क्यों देते
22:21इश्वर ने स्रिष्ठी की रचना करते होए सब को एक ही रंग का रख दिया
22:24भूक दीप प्यास दी जल को एक ही दिशा में बहना सिखाया
22:28अगनी को हर गर में उतना ही प्रकाश और उतना ही प्रकोप दिया
22:32वाईयो को सब के जीवन में उतना ही आवश्चक बनाया
22:35जब ईश्वर ने भेद नहीं किया
22:37तो इंसान को क्या अधिकार है कि वो भेद करें
22:41मनुष्य का धर्म उसके अधिकार
22:45उसकी जाती या जन्ञ से नहीं उसके कर्म से बनते हैं
22:53ब्रामिन या शत्रिय वैश्च या शूत्र
22:58मेरी जाती ने मेरे बाणों की धार कम तो नहीं की न
23:07कुंति मा, बात तो सही क्या रही है, पर आश्यरे जनलग बात तो यह है कि इसके बारे में कोई
23:14जानता क्यों नहीं, कौन है ये कबच कुंडल बाला?
23:28योद्ध कॉशल का प्रदर्शन हो, तो अपना कॉशल दिखाने का अधिकार हर योद्धा को मिलना चाहिए
23:33अरजुन और इस दाविदार के बीश्ट परदा होनी चाहिए