Skip to playerSkip to main content
  • 6 months ago
The story continues after the initial introduction of Karn and the royal world of Pukhiya. At a key archery contest, Karn displays his exceptional archery skills — but instead of being praised, he faces criticism and social backlash because of his humble background and status. Even though his talent impresses some, others mock and judge him, leading to tension between Karn and members of the royal assembly. This episode highlights Karn’s struggle against prejudice and the early challenges he must face as a warrior trying to be recognized for his skill rather than his birth.

Category

📺
TV
Transcript
00:00झाल झाल झाल झाल
00:31तुम्हारे तीरों की धार देखी जाएगी
00:38जब वजय तक अमुकुट पहना जाएगा
00:41तब हर आग को ये माथा ही दिखेगा
00:44तोड़ा सजा रहा तो पुरा क्या है
00:47इतना एंकार
00:50एंकार निए
00:52विश्वास
00:54उतना ही विश्वास
00:56जितना रत की लगाम हाथ में लेती हो ये तुम्हे था
01:00मेरी जीत तो पक्की थी
01:01मेरे मित्र जुत है मेरे साथ
01:05मेरी भी जीत पक्की है
01:07मेरी मित्र एक कुशल सार्ती है
01:09वो मेरे हर तीर को अपने लक्ष तक
01:13अपनी प्रात्ना उसे पहुचाएगी
01:17और मुझे पुरा यकीम
01:19वो पहले ईश्वर के खुब हाद जोड़ेगी
01:25मैंने कोई हाथ वाथ नहीं जोड़े
01:27अच्छा
01:28मेरी हाथ में पूजा का दागा कैसे
01:33आम
01:34वो तो बस ऐसे
01:41जीत जाओंगा तो जो माँओंगा वो मिलेगा
01:45मैं शर्ट नहीं लगाती
01:51लखरेग इतना अच्छा राजक्मार में उतला
01:54सोच लो
01:56कुझ हाथ से अफसर निकाना जाए
01:58शुभो मंगलो
02:11स्वागत है
02:12आई
02:14आई
02:15आई
02:15आई
02:16आई
02:23आई
02:27राजकुमार दुर्योधन
02:29रंग भूमी में पधार रहे है
02:50राजकुमार अर्जुन
02:51रंग भूमी में पधार रहे है
02:54राजकुमार अर्जुन की राजकुमार अर्जुन की राजकुमार अर्जुन की राजकुमार अर्जुन की राजकुमार अर्जुन की राजकुमार अर्जुन की राजकुमार अर्जुन
03:08की राजकुमार अर्जुन की राजकुमार अर्जुन की राजकुमार अर्जुन की �
03:14कि आपना कि उना एंड, मैंने पुछिस किया एंड, कर दोदा है कि आपना कि इना प्रफ एंड कि आप़ाद।
03:47कि निसी चमक बरदाश्ट नी कर पए यहां जब मेरे तीरो की नोग कॉंदेगी तब क्या हाल होगा तुमारा अर्चुन
03:54अपनी सारी शक्तियां बाते बनाने में व्यर्थ करतों के ना तो दनुष की टो ना किची चाईगी तुमसे
04:17अर्चुन तुम्हें कुछ देना था तुम्हें कुछ देना था एग के यह रत्मय इस संसार में से पेखी है पाच
04:28अर्ट वात्व मिलके भी से तोड़नी सकते है
04:33कि कहते हैं यह रतने जिसके पास है न वो कभी नहीं हार सकता
04:48कि इसे संभाल लोगे न उसे कोई छू भी नहीं पाएगा
04:54हमारी बच्पन की मित्रता को इन दोनों नहीं आगे बढ़ा है
04:58अब तो मित्रता से बढ़के रिष्टे बनने है
05:30यहाँ बढ़के रड़के पास है
05:32अबहाँ ड़एफ दोनों नहीं है
05:49यहाँ तो मित्रता बढ़के रगल
05:52कि ऑन दोनों दोनों पास्थे आद्धाफेश
06:10कोड़ो और पांड़ो की युद्ध कोशल का प्रदर्शन शुरू हो रहा है
06:44सभी राजकुमार एक से बढ़कर एक है पर उर्वी इन में सर्वश्रेष्ट कॉन है इसका पैसला कैसी होगा
06:50समय जवाग देदेगा तुम बस देखती जाओ
07:02राजकुमार नकुल और सहदेव विजाई हुए और राजकुमार युदिश्धिर में अपने कौरव प्रतीजवंदी को परास्त किया
07:13राजकुमार भीम कौरव कुमार को पचाड कर मल्य युद्ध में विजाई हुए
07:20और अब आ रहे हैं राजकुमार अर्जुन अपनी धनुर्विद्या का प्रदर्शन करने
07:33प्रदर्शन करने
07:58कर दो
07:58कर दो
08:28कि अगल जाएंगे अपर नाएंगे लिए घूरी करता है
09:04शताल का जूल्टा अर्जून केंव
09:25सरश्रेष्ठ योद्धा हो शमा चाहूंगा गुरुदेव
09:51एग निर्जीव धाल जो ना ही अपनी साहेता कर सकती है
09:54ना ही पलटकर वार उसे भेद कर कोई अपने आपको श्रेष्ठ कैसे साबित कर सकता है
10:00सर्व श्रेष्ठ वो है जो दो श्रेष्ठ के बीच का मुकाबला जीते
10:06तो मेरी गदा अर्जुन के तीरों को चुनौती देती है वो मुझे छू कर दिखाए
10:20गवराई ये नहीं गुरु दुरों है वहाँ
10:23अर्जुन दुर्योधन मुकाबला तुमारे तीर और गदा के मद्धे होगा
10:29रक्त की एक भी बूंद ना बहे अन्यता चोट पहुचाने वाला इस रंग भूमी से बाहर होगा
10:35प्रदर्शन को युद्ध में ना बदला जाए
10:56प्रदर्शन को चाहर शोड़िया प्रदर्शन के वाला इसाइए
11:04प्रद्ड़्स को युद्ध में बुद्ध स्वार पंद गलबाः
11:04जाए
11:05इस प्रद्ड़िया लोग में इस भापता है
11:14फुड़ी जो रह में निए खुड़ी हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ
11:36कर दो बड़े पुछन धाज कर दो कर दो दो कर दो पूला सुछब कर दो दो तो तो पर
11:51दो कर दो दो रहां ये अगरे तक दोस्ता है
12:21लगता है तुम्हारे धनुष ने हार माननी है अनुष
12:25मेरी गदा से तुम्हारे तीर आख भी ना मिला पारे
12:37मेरे चर्णों में तीर चला शमा मांग रहे हो या अजिर्वाद
12:49अरे तीर राजकुमार अरजुन क्या कर रहे है
12:51राजकुमार अरजुन भूमियों पीर क्यों मानन
12:54भी आखे हाथ
13:17राजकुमार अरजुन की राजकुमार अरजुन की tents
13:23Rajkumar Arjun Khi!
13:25Rajkumar Arjun Khi!
13:26Rajkumar Arjun Khi!
13:45जुरुदेन बहीया
13:48आस्वी कार कीच है
13:53हाज सुविकार कीजे, जेश्ट.
13:57आज तो दुर्योदन की टे हैं.
14:00अर्जुन के बार्णों की काट इस दुनिया में सुर्ट तीन ही लोगों के पास है.
14:03एक तु भिष्मा पितावा, गुरुद्रोन और उनके गुरु परशुडा.
14:08और आज तुर्योदन को इन तीनों में से कोई भी मुप ने करा सकता है.
14:15अंतिम बार कह रहा हूं भाया, हार सुविकार कीजी.
14:43एक झाहे लाए लाए लाए ला में सितत है.
14:51अंतिमार काहूं अंतिमा भी में है.
15:09कर दो कर दो
15:38कर दो कर दो कर दो
16:00कर दो बौष्यक्त
16:03पोष्यक्त
16:04कर दो
16:06के दो
16:16कोष्यक्त
16:18यह गवाज कॉंडल, यह तो मेरा वही पुत्र, जिसे मैंने त्याग दिया था
16:59यह तो मेरा वही तो मेरा वही तो मेरा वही दिया था
17:33यवस्थरोगरमारी वायमत्यक्पा दुलजे
17:37सिल्दे शिल्दे सप्रुबरत शैर
17:41यवस्थरोगरमारी वायमत्यक्पा दुलंजे
17:51कौन हो तुम जिसने बिना अनुमती इस रंग भूवी में तीर चलाने का धुस्सा हस किया परिचेदो
18:01कर्ण
18:01कर्ण
18:03कर्ण
18:13कौन कर्ण
18:15कहां से माता पिता कुल जाती
18:23हर जुटी कुछ भी बोल रही है
18:25दुर्वासा रिशी ने तुझे किसी भी देव का आवाहन कर
18:28उनसे संतान प्राप्ति का वर्दान दिया है
18:31हाँ
18:31नई मैं नहीं मानती
18:33बिना परग कैसे कर लो विश्वास
18:35अरे तुम दुर्वासा रिशी के वर्दान पर संदे कर रही हो
18:39पता नहीं पर
18:40पर मन नहीं मानता कि ऐसे भी हो सकता है
18:43कर किसी का आवन
18:45फिर दूद का दूद और पानी का पानी हो जाएगा
18:47हट बावली
18:50यदि कोई देव आगे तू
18:51और वर्दान पूरा कर गे तू
18:54तो फिर कर ते रे छलावे पर विश्वास
18:57मैं तो नहीं करती
19:13ओम सुर्याए नमहा
19:15ओम सुर्याए नमहा
19:34दूर्वासा रिशी ने तुझे किसी भी देव का आवान कर
19:36उनसे संतान प्राप्ती का वर्दान दिया है
19:38नहीं, मैं नहीं माद दूद का दूद और पानी का पानी हो जाएगा
20:11दूर्वास
20:12संचुलाइन, वहाँ वहाँ, संचुलाइन, वहाँ, संचुलाइन, वहाँ, संचुलाइन, वहाँ, संचुलाइन, वहाँ, संचुलाइन, वहाँ, संचुलाइन, वहाँ, संचुलाइन, वहाँ, संचुलाइन, वहाँ, संचुलाइन,
20:39वहाँ, संचुलाइन, वहाँ, संचुला
20:42वर्दान अनुसार मैं तुम्हीं वीर कताती सुन्दर एवं अपराजै स्वन कवच कुंडल धारी पुत्री देता हूँ
21:06सभा तुम्हारे जवाब के प्रतीक्षा में है कर्ण
21:10सूथ पुत्र तुम्हारा जन तुम्हारा भाग लिख गया है कि तुम धनुष नहीं
21:14घोडों की लगाम पा
21:15तु सूथ पुत्र है यदि तुझे वीर रतापी बनना होता और तु सूथ पुत्र नहीं एक शत्र ये बनकर पहता
21:20होता
21:21सूथ पुत्र
21:23रक्त है यानि मनुष्य हूँ
21:26फनुष है यानि योध्ध
21:28मेरे बार्ण अपनी धार दिखा चुक है
21:30यानि अर्जुन को चनौती देने योग्य हूँ
21:32क्या इतना परियाप्त है
21:36नहीं है परियाप्त
21:38आग चिता से ली हो तो उससे मंदिर के दीप नहीं जलाये जाते
21:43जल पोखर का हो तो उसे गंगा जल समझ कर घर में छिड़का नहीं जाता
21:48भूमी पत्री ली हो तो उसमें खेती नहीं की जाती
21:51हर चीज का नियम होता है
21:54एक्षत्रियों को एक्षत्री ही चुनवती देने का अधिकार रख सकता है
22:00समाज के नियम समाज के रखवालों ने बनाए
22:02और प्रक्षिती ने हर बार तोड़े
22:05परना युद्ध अगर सिर्फ एक्षत्रिय का अधिकार होता
22:08तो औरों की बुजाओं में बल क्यों आता
22:12शिक्षा अगर सिर्फ एक वर्ग का अधिकार होती तो ईश्वर सब को बुद्धी और ज्यान क्यों देते
22:21इश्वर ने स्रिष्ठी की रचना करते होए सब को एक ही रंग का रख दिया
22:24भूक दीप प्यास दी जल को एक ही दिशा में बहना सिखाया
22:28अगनी को हर गर में उतना ही प्रकाश और उतना ही प्रकोप दिया
22:32वाईयो को सब के जीवन में उतना ही आवश्चक बनाया
22:35जब ईश्वर ने भेद नहीं किया
22:37तो इंसान को क्या अधिकार है कि वो भेद करें
22:41मनुष्य का धर्म उसके अधिकार
22:45उसकी जाती या जन्ञ से नहीं उसके कर्म से बनते हैं
22:53ब्रामिन या शत्रिय वैश्च या शूत्र
22:58मेरी जाती ने मेरे बाणों की धार कम तो नहीं की न
23:07कुंति मा, बात तो सही क्या रही है, पर आश्यरे जनलग बात तो यह है कि इसके बारे में कोई
23:14जानता क्यों नहीं, कौन है ये कबच कुंडल बाला?
23:28योद्ध कॉशल का प्रदर्शन हो, तो अपना कॉशल दिखाने का अधिकार हर योद्धा को मिलना चाहिए
23:33अरजुन और इस दाविदार के बीश्ट परदा होनी चाहिए

Recommended