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  • 6 months ago
ओडिशा  के पुरी के बिशिमतरी गांव की महिलाएं अपने हाथों से अपनी तकदीर लिख रही हैं. जूट से डोर मैट, स्लीपर, पेन स्टैंड, बास्केट, लैपटॉप बैग, लंच बैग, वाटर बॉटल बैग जैसे नए-नए सामान बनाना अब इनका जुनून बन चुका है.  पहले चूल्हा-चौका करने के बाद ये महिलाएं घर में बैठी रहती थीं. परिवार में गरीबी थी, लेकिन कमाई का कोई जरिया नहीं. बात 2015 की है. टेलरिंग का काम करने वाले अमिय पोद्दार ने कुछ महिलाओं को ट्रेनिंग दी, फिर इन महिलाओं ने टेलरिंग मशीन पर जूट का सामान बनाना शुरू किया. इन सुंदर, टिकाऊ और इको-फ्रेंडली सामान को जिसने भी देखा उन्हें भा गया. फिर ऑर्डर आने लगे, डिमांड बढ़ने लगी. अब तो ओडिशा के बाहर से भी ऑर्डर आ रहे हैं.  यहां काम करने वाली महिलाओं की संख्या अब बढ़कर 50 हो रही है.. इनकी प्रोडक्शन यूनिट भद्रेश्वर जूट क्राफ्ट प्रोड्यूसर ग्रुप के नाम से मशहूर हो गया है. लेकिन इनकी एक बड़ी समस्या है कि इनके पास काम करने के लिए जगह नहीं है.. जहां सभी महिलाएं एक साथ बैठकर काम कर सकें और ऑर्डर को पूरा कर सकें.  

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00:59पर जूट का समान बनाना शुरू किया, इन सुन्दर टिकाव और इको फ्रेंडली समान को जिसने भी देखा उन्हें भागया, फिर ओर्डर आने लगा, डिमांड बढ़ने लगी, अब तो ओरिशा के बाहर से भी ओर्डर आ रहे हैं।
01:292000-2001 में हस्ट सिल्फ विभाग ने 30 महिलाओं को ट्रेनिंग दी और 50 महिलाएं इन में जुड़ गई हैं।
01:59बिजनिश ठीक ठाक चल रहा है, लेकिन हमारे पास घर नहीं है।
02:06हम किराई के घर में काम करते हैं, अगर सरकार से हमें घर मिल जाता तो हमें बहुत खुशी होती।
02:12हम 50 महिलाओं काम करती हैं, लेकिन एक साथ बैठ कर काम करने की जंग हैं।
02:18इस बिजनस से हर महिने 50 हजार से लेकर 2 लाग तक की कमाई हो जा रही है।
02:24सलाना ये कमाई 15 लाग तक पहुँच जाती है।
02:27रथ यात्रा, बाली यात्रा और सुभद्रा शक्ती मेले में तो इनकी खूब बिक्री होती है।
02:33बस अब इन्हें जरुरत है थोड़ी सी मदद की ताकि और जादा महिलाओं से जुड़कर अपनी आत्म निर्भरता की दास्ता लिख सके।
02:41पिजवी भारत के लिए ओडिशा के नीमा पाड़ा से बिरंजन मलिक की रिपोर्ट।
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