00:00जब बजट आता है फाइनांस मिनिस्टर की स्पीच में कुछ ऐसे वर्ज घूमते हैं जो सुनने में बेहत हैवी लगते हैं
00:11फिस्कल डेफिसेट, कापेक्स, रिवेन्यू डेफिसेट और अक्सर लोग ये सोचते हैं कि ये सब एक्सपर्ट के लिए हैं
00:17लेकिन सच ये है दर्शकों, बजट के यही शब डिसाइड करते हैं कि आपकी EMI सस्ती होगी के महगी, पेट्रोल और डीजल की रेट क्या होगे और आपकी इंकम पे प्रेशर बड़ेगा या कम होगा
00:30इसलिए आज समझते हैं बजट के 10 सबसे पावर्फुल और खतरनाक वर्ड्स बिलकुल सिंपल भाषा में बिना उधर उधर की बातों में बिना खुड़ेगा
00:40सबसे पहले तो बात समझी आप फिस्कल डेफिसिट क्या होता है
00:43फिसकल डेफिसिट का साफत और पे मतलब होता है कि सरकार कितना उधार ले रहेंगी
00:48फिसकल डेफिसिट का मतलब गवर्मेंट के टोटल खर्च और टोटल इंकम के बीच में कितना ग्याद है
00:54अगर सरकार 100 रुपे गमाती है, tax, disinvestment और fees से और 110 खर्च करती है, scheme से, salary से, infra को develop करने में, defense पर खर्चा करने में, तो 10 रुपे का fiscal deficit होता है, असान मार्शा में
01:09ये इतना important क्यों होता है, क्योंकि fiscal deficit जादा हुआ, तो सरकार जादा loan लेगी, जादा borrowing होगी, interest rates उपर जा सकते हैं, और interest rates उपर जाएंगे, तो home loan, car loan, महेंगे पर जाएंगे, इसलिए fiscal deficit का size डारेक्ली आपकी EMI और महेंगाई से link होता है,
01:28नमबर 2 पे आता है CAPEX, यानी capital expenditure, ये होता है growth का असली इंजन, CAPEX वो खर्चा है जो future के लिए asset बनाता है, जैसे highways, railways, ports, power plants, hospitals, schools, इन सब पे खर्चा करने को CAPEX कहते हैं, CAPEX एक बार का खर्च होता है, लेकिन उससे जो फायदा है वो आने वाले कई सान मेंगाई है, और इससे
01:58होती है, तो jobs create होती है, jobs होती है, तो demand बढ़ती है, economy strong होती है, इसलिए experts हमेशा कहते हैं कि CAPEX बढ़ेगा, तो देश की economy बहतर बहुता है, तब आते हैं नमबर 3 पे revenue deficit, revenue deficit होता है, रोस का खर्चा भया कैसे चाहिए, revenue deficit तब होता है, government की जो regular income है, वो regular expenses को cover ना करता है, regular expenses ज
02:28खर्चे हैं, अगर ये भी नहीं पे होती है, तो इसको deficit होता है, अब example है, अगर आपकी 50,000 की महीनी की तंखा है, और खर्चा 55,000 का है, मतलब राशन और बिजली के लिए भी loan लेना पड़ रहा है, तो वो ऐसे होता है, अब danger signal हो जाता है, क्योंकि revenue deficit का मतलब होता है, कि सर
02:58होता है, जैसे अगर government अपनी companies, यानि PSU को कुछ stake पेचती है, जैसे LIC, VPCL, Shipping Energy, PSU, इन companies के stakes बेचके government जो पैसा इखठा करती है, उसे उखता जाता है, अब government ये क्यों करती है, देखो दर्शकों, fiscal deficit control करने के लिए, tax बढ़ा है, बिना पैसे जोडने के लिए और एक अच
03:28होता है, CES, ये tax की ओपर, tax ये लोग उकसर नहीं समझता है, CES एक additional tax होता है, जो किसी specific purpose के लिए लगाया जाता है, जैसे health CES, education CES, और जो important difference ही होता है, कि normal tax states के साथ share होता है, लेकिन जो CES होता है, वो पूरा का पूरा center के पार जाता है, इसलिए जब CES बढ़ता है, तो
03:58या finance bill है, budget का legal weapon, budget speed सिरफ proposal होता है, finance bill वो document है, जो tax rates को बदलता है, tax labs को define करता है, और surcharge CES implement भी करता है, जब तक finance bill पास नहीं होता है, budget का announcements law नहीं पड़ती है, इसलिए salary class के लिए finance bill सबसे critical document होता है, नमबर साथ पे आता है, appropriation bill, सरकार को खर्च करने की इजाज़त,
04:24appropriation bill का काम सिरफ एक है, कि government को legally पैसे खर्च करने देना, और constitution के मताबिक, सरकार बिना parliament approval के, एक रुपया भी consolidated fund of India से नहीं निकाल सकती है, ये बिलपास हुआ, budget execute होगा, नहीं हुआ, तो budget सिरफ एक paper work gear रह जाएगा, इसके बाद बाद आती है, custom duty, यानि important चीज़ों का जो
04:54महंगी हो जाएंगी, जो foreign electronics यानि महंगी हो जाएंगे, और सरकार custom duty यूज़ करती है, domestic industry को protect करने के लिए, imports को control करने के, नंबर 9 पे आता है, primary deficit, इसका मतलब होता है, current government का असली खर्चा, primary deficit होता है, fiscal deficit minus interest on old roads, इससे पता चलता है, कि current government अपनी policies के लिए, कितना extra उधार नह
05:24है, अब आखरी और नंबर 10 पे है, vote on account, यानि temporary budget, election year में full budget नहीं आता है, सरकार कुछ महिने के खर्चे के लिए temporary approval लेती है, और वो vote on account किया जाता है, इसमें कोई बड़ा tax change नहीं होता है, कोई long term policy भी announce नहीं होती है, तैसे हाला कि इस बार तो वो आना नहीं है, लेकिन आ�
05:54तो कोई भी budget आपको confusing नहीं लगेगा, और ना आपकी जेब को बिना warning के कोई जटका है, आप देख रहे हैं One India, मैं हूँ आकर शवाशिक