00:00आज इतक्या वर्षान उंतर मागे वड़न बक्तान्ना, तुभी कसा बक्ता या गुष्टी कड़े कि कदी कुप रसिद्धी जहली असेल, कही गैरसमाज पसर ले असेल, आनि आता हवड़ हड़ू, लोकान नहीं हे कड़त, कि तेहां जे आरूब जहले होते, कि वहां गैरसम
00:30सत्य समझ नहीं उसीर लग्स, तस अनेक जे जे शेश्वी धाले त्या अनेका नहीं संकर्टाता सामना काराव लाग्या, त्या मने मी तचे तुटेन यह अप्यक्षा करना अयोग्या है, मैं मानवता धर्म पाड़तू, आनि मानवता धर्म यह गोष्टी और माजा विश्�
01:00आनि मानवते साथी कार्य करत रहलू, त्यम काई दन आवडला नसेल, तनी टिका केली, काई दन आवडला ते माला जोइन्ट जले, आनि आज जवज़ती चाड़िस वर्षत प्रवासहा अशा प्रकर अलेला है,
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