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  • 7 weeks ago
किसी देवी-देवता की मूर्ति हो या राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की मूर्ति... चाहे मोर की कलाकृति हो या फूलों का गुलदस्ता... यह देखने में इतना सुंदर है कि नजरें हटाने का मन नहीं करता. जो भी इसे देखता है, एक पल के लिए रुक जाता है और इन कलाकृतियों को निहारता रहता है. यह सब देखकर मन में आता है, वाह... कितनी सुंदर चीज है.हालांकि, ये सभी सुंदर कलाकृतियां बांस से बनी हैं. इस कला के पीछे जिस कारीगर ने सबका ध्यान खींचा, वह हैं एकादशी बरीक. एकादशी न केवल बांस से कलाकृतियां बनाते हैं, बल्कि उन्होंने देश-विदेश में कई लोगों को बांस के प्रोडक्ट बनाने की कला सिखाई है और उन्हें रोजी-रोटी कमाने का रास्ता भी दिखाया है.ओडिशा के कटक जिले में बांकी क्षेत्र के तालाबस्ता गांव के 56 साल के एकादशी बरीक 44 साल से बांस से कलाकृतियां और घरेलू उपयोग के सामान बनाकर अपनी रोजी-रोटी कमा रहे हैं. परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं होने की वजह से एकादशी पढ़ाई नहीं कर पाए और बचपन से ही उन्होंने बांस को अपनी कमाई का जरिया बनाया.1981 में उन्होंने बांस से उपयोगी सामान बनाने की ट्रेनिंग ली. 1982 में उन्होंने बांस से सामान बनाना शुरू किया. उन्होंने 1984 से बच्चों को ट्रेनिंग देना शुरू किया. धीरे-धीरे उन्होंने खुद बांस से आर्ट बनाया और सरकारी और प्राइवेट लेवल पर अलग-अलग संस्थानों में बच्चों को ट्रेनिंग दी. एकादशी ने गांव की कई महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुफ्त में ट्रेनिंग भी दी है.

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00:00राश्ट्रफिता महात्मा गांधी से लेकर भगवान बूध देवी दुरगा भगवान गनेश की इन अजबुत कलाकृतियां जो देखता है बस देखता ही रह जाता है ये सभी चीजें बांस से बनाई गई है ओडिसा के कटक के बंबू आर्टिस्ट एकादसी बारिक ने इन
00:30बांस मेरे लिए भगवान है मुझे एक दिन खाना नहीं मिला इसी की वज़ा से मैं पढ़ाई नहीं कर पाया बांस की कला ने मुझे आगे बढ़ाया और शिर्च पर पहुँचाया ग्रामीन मैलाओं के रोजगार के लिए मैं उन्हें फ्री में ट्रेनिंग देता रहा हू
01:00ट्रेनिंग भी दी अब तक वो 13,000 से ज़्यादा बच्चों को ट्रेनिंग दे चुके हैं इलाके के करीब 200 महिलाओं को ट्रेनिंग दे कर उन्होंने उन्हें आर्थिक आजादी दिलाई इन कलक क्रितियों के साथ साथ एक अदसी बारिक बास से सजावट के सामान और जु�
01:30इनके डिमान ज्यादा है लोग प्लास्टिक से होने वाले नुकसान को समझने लगे हैं ऐसे में बास का बना समान लोग प्रिये हो रहा है अमेरिका और मलेसिया जैसे देशों से भी इसके बास के उत्पादों के ओरडर आ रहे हैं इससे उनका होसला बढ़ा है एकादसी ब
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