00:00ये मनी जो तुम्हारी रक्षा करती है। तुम्हारा अपवित्र मस्तक इसकी योग की नहीं।
00:08मैं वासुधेव कृष्ण ये घोशना करता हूँ कि तुम्हारा अमर्ता का ये वर्दान तुम्हारा श्राप बनेगा।
00:18युग बदल जाएंगे, वंच बदल जाएंगे, धर्ती पर प्राणियों के जीवन और जीवन के अर्थ बदल जाएंगे किन्तो तुम इसी धर्ती पर अनंत काल तक अपने पापों का पोज लिए फटकते रहोगे अश्वत्थामा।
00:32तुम्हारे घाओं की पीड़ा तुम्हें सोने नहीं देगी। तुम मृत्यू मांगोगे, किन्तु मृत्यू नहीं होगी।
00:42जिस बालक को मारने का तुमने अक्षम्य अपराद किया है, वो एक गौरवशाली सामराज्य की नीव रखेगा अश्वत्थामा।
00:50और तुम्हारे पास उसकी विरासत और पराकरम का साक्ष्य बनने के अतिरेक्त कोई विकल्प नहीं होगा।
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