00:00आम अरमोर रामा हो राम
00:30भी आप अब यह भी आप लो थर सुवल्लाह की रामर का love करलेग कि भोजन करज़िए
00:45घर्ठार कि लिजर्य वर अच्छा्व रामर हुआ है जिन्या लामर रामर कि भोजन तो रहां करब लेकिन वाचन राकय हमवरे भर्त्रों के आवड़ क वह
00:59तो अभी ये सिर्म कहानी शुरू कर रहते हैं ये लिए भुरहरी के ताइम भुरहरी है के ताइम जाल हुआ समय
01:06लेकिन चार लाइन गाने के भुन का बाता
01:10तो बरसियो दसा जिंदधी भने
01:19धमित भावना में खिलाती है ठोकर
01:25भव बुद्धि का चोक सीवन सकीना
01:31तो जोताओं को अपन रखाथ मोकर
01:35अहंकारी रावर प्रता पीधा राजा
01:39अब दुराचार से प्यार करता रहा
01:44शिव का पुजारी अहंकारी भारी
01:48घडा पाप का नित्य भरता रहा
01:55रामण यतना बड़ा ब्रामण रहल
01:59वह तना बड़ा शक्ति सालीर राजा भी रहल
02:03और वह तना बड़ा दुष्ट भी रामण रहल
02:06तब दुई लाईन ये रामण के भी से में बार
02:09भाईया भाईया सुरती वाले भाईया
02:39जी अरे मेरी हालत पे दुनिया हसे तो हसे
02:47अरे आपको मुस्कुराना नहीं चाहिए
02:53मेरी हालत पे दुनिया हसे तो हसे तो हसे आपको मुस्कुराना नहीं चाहिए
02:59अरे आपको मुस्कुराना नहीं चाहिए
03:07अरे आपको मुस्कुराना नहीं चाहिए
03:14लेकिन तो है पती पढ़के दा
03:22कि अरे जिस नजर में भावय कि जिस नजर में दयादान दोनों नहीं
03:33अरे उस नजर को कि अब उस नजर को नजारा नहीं चाहिए
03:48तो जिस नजर में दयादा न दोनों न हो
04:18और चादनी के सहारे हतारे सभी और चादनी को सहारा नहीं चाहिए
04:48यह करोज चमारावर घर से समूद में आरे दामिन दम करही थी अंबर के बोद में
05:03यह एकदम सबेरे का पहद हल भोरहरी के टाइम रहल शुरूई देता निकलत रहलन रावण महराज सिकार खेलब दे रत पर बैट करके मैनाख परवत के तरफ चलन है तो घटना का भटल बड़ी मजेक बाब्बा यह करोज चला रावण घर से समूद में दामिन दम करही थी अ
05:33के यह उतरस रहा था अरे कलियों के पहलूओं में कलिंदों का काम था उतरा मैनाक गिरिपए पुनम का चार था आई थी पूजा करने नारंसक की घुजरिया आई थी पहले बार जो पीतन की नगर्या रावण महराज अपने रत को ले जाकर के मैनाख परवत पर रोग दिए
06:03और जब रख से उतरते हैं तो क्या देखे की एक बड़ी नीक है यह तनी नीक यह तनी नीक महरारु ले उकल की रावण का मन लगल का चोते अब रावण धीरे धीरे ओहरे घुसकत जाये लगल का फिलिम का नाम बाद वह जवना आप लों जानत बटा की दंगा किनार मुरा
06:33जानत बाद वह तनी नी नी दरवन से लेकि रामण बोला वा तो ही और थी यह कोर जात बाद पहरल बाद पहर बोला बली रामण बाद दूला हनत अरे आई है बहार कौन बुले संत आई है बहार कौन
06:58बसी रहा, और रहा, लेकिन ये सुना की उरहल का उन देखा भरहरी के टाइम बहाँ, धिरे धिरे पांच बजी जा था, अब घरे गई लेकिन कुछ भाई लोगे टाइम हो गई लेकिन,
07:27दस मिनट तमेले, और उरहल कवन की नारंतक के दुलेहिन बिंदु मती रहल, नारंतक काउन रहल, नारंतक रावन के बेटवानी, उरावन के पतोह लगत रहल, लेकिन ये बुलावत उहरे जाए लगल, तो वहां का भावा कहरल भरावता,
07:44कि कवन कली से लाई, खुस बुचो राई के, आउतरा है चाद दोने बादा रासे,
07:54करता है हवावन भी सो, अरे भुजवन से, करता है हवावन भी सो, भुजवन से,
08:18आई है बहार कोने बुले सन से,
08:23ये बाबु जी पाँजे बुरुजवन भाईया की तरफ से अपुजा रहल, अपने बीसो भुजा से बुलावा कहाए,
08:29कि आजा, आजा, आजा, आजा, आजा, आजा, ये तरे बोलावा तो तो लगवा पहुंचे लादबा,
08:33लेकिन उन लगठ रहल उनका पतो न पतो है रामर का है,
08:37लेकिन काम बातना सर पर सवार भल कर रामर का बुधी फेल हो गई,
08:41पुलावा तो तो तो तरे लगवा तो ख़र जाए,
08:43बिंद मती कह ला तो भॉर्ड मघवा खराब हो गल बुडग्धा हो गई ला,
08:46हमार ससुर लगवा तो हरे बेतवा के और थाई तब पीता तु लिहवा और अपने पतो पर तुहर दिमाग खराब होगल रामर कहला हर जो सामने से हम पतो शतो आज नाजन से घुसु के लगवा या रामर दूपर अगवर घुसु के लगए पहुच गयल तब उस समझावे ल
09:16नो करिया पिया छोई द्या अरे जानी जाया कोई लरिया हो नो करिया पिया छोई द्या जबू कहला के हम तवर पतो लगवा तर रामा का कहतबा
09:30दियार पहर चाजरवा पधायल दियारवा पहुच गयल पहुच गयल पहुच गयल पहुच गयल पहुच गयल पहुच गयल पहुच गयल पहुच गयल पहुच गयल पहुच गयल पहुच गयल पहुच गयल पहुच गयल पहुच गयल पहुच गयल पहुच गयल पहुच गय
10:00कि अरे जबरी लुटाना चाहो बनवा में पामी मनवा में सोचली नारंत करामी अरे मांगला मलाई अब बुल्हाई में सचुरो पुरवतनी चीखाईदा
10:17अरे देखावा जनी न खड़ो पुरू उतनी चीखाईदा
10:23रामण एकदम खुसुक के लागमा चल गया है तो आज योगर आई गेली तो आज तो नहीं करजवा कर दहिया मिठाए जाए जाए दुरू पुरुषकार हमरे यह मुल्ला अगर मुलायम बने हैत यतना प्यार दिये तना नरव हो जाए कि फूल से भी नरव हो जाए है और अ�
10:53तो पस्त्र खलवार से सब्सक्ता वंगाइगे निंवत्री का दूसरा रूप हो गया को कर दिया कर दो कर दो को टांट कर दो तो कंदेग को यह जा आटकर देगार कर दो कि अज़िए गुश्चे में आगर के फॉराद देति है रामण को क्या अब यह तना को मत कर दोड़�
11:23गुस्ते में आका स्राब देती है क्या जब काम बासना बहती है तो मानव आत्म घ्यान खो जाता है गुस्ते में हो गई वह बिंदमती और रावन महाद को स्राब देती है क्या
11:42कि अरे नीच रावर सुन ले कि जब काम बासना बहती है तो मानव आत्म घ्यान खो जाता है और जिंदा हो करके भी मानव मुर्दा समान हो जाता है हाथ जोर कर बिने करत पर बिनेन मानत त्याचारी है रो रो करके गुस्ते में बिंदमती और बचन उचारी है
12:04कि अरे नीच रामर सुन ले
12:06कि देती हुसराप में तपबल से पुरुसत तुय पनाथ हो जाओ
12:11अब लाको सताने वाले पापी रामर ही जड़ा हो जाओ
12:16बन गल कराम साथ ये जहला है
12:19कि जो उन्हें समान के पाई के
12:21हमके पर्षान करतवा त्वार उस समन वा गायब हो जाओ
12:24ऐ है भाई यार है
12:27यस्तराप बिंद मत्री के रामर के लगल पढ़ते वेके
12:30कुल सर समन गायब हो जाओ
12:32तैंड़ गल जोकर सर समन कुल गायब टोद मत कले बहु खुल समन वा का हो गया
12:37तो रावण अपने मनवा में सोचद बा तर्जवा हुँ है बाँ
12:41कि अर गिर गिर जालाना रे भुनावा और गिर गिर जालाना रे भुनावा
12:56गिर गिर जालाना कप पी अमरे चलता रही बिदा
13:03कप्पी अमरे जाई के बप्पे लाद्या दुनावा दुनावा दुनावा दुनावा
13:33दुनावा दुनावा दुनावा दुनावा दुनावा दुनावा दुनावा दुनावा दुनावा दुनावा दुनावा दुनावा दुनावा दुनावा दुनावा दुनावा दुनावा दुनावा दुनावा दुनावा दुनावा दुनावा दुनावा दुनावा दुना�
14:03कि तोई तोई जशंकर ना कोवन की की अपनने अपने अपनो ताज तौई जशंकर
14:22कि तोई तोई जंखय कि अपने हथवसे अपने तनवा रवनावा तोई तोई जंखय ना
14:31कि अरे सर से भलही सब बची जा लात्राप से बचे तन कोई हो रामा
14:38यह देखें न खाना खाय न पानी पिये उदासल रहा हर्दम
15:07कारीëंग लेकिन खेंचे नहीं देखेंट अनसे लेकिनन कोटना आपष्टंदम
15:28करद्धुर्फान आज दूरेंगें होना।
15:36लेकिन का हो गल कि छो महीना बीद गलना एक दिन बोलत हुआ ना घर में आवा तो हुआ कोनो बात जरूर हो अरे मंदोदरी सोच गे कि बुझला हमसे कोनो गल्ती हो गई लिए इसे नराज हुआ ना
15:47सोच लेकि आज अपने दुलहा के बोलाई भी अवही कोनियावाला घर में सेज लगाई भी बोलाई भी उनसे पूछ गी का हमसे कोनो गल्ती हो गई लोग एक दिन मंदोदरी आपने उपाए लगाई देले कोन उपाए
15:59कि अरे जलबीन जलबीन एरे हो मौरे रामा आरे जलबीन मीनबी कल दशत अंढर कह भूजारीया हो समर्या नाही आवैसे जर्या ना
16:15कि अरे फुलावा रची रची सेज लगाई और एक दिन दासी से बोलावाई एक अदम कोने वाला घर में सेज फूलन का लगावले और दासी से बोलो लेकि जा बुला लिया वा
16:31दासी गई यह बोला के लिया रामर खानवा खाके लपसना बहरे निकलल चलन मंदोरी गट्टा पकल ललकल यहर का चला एक तुनिया वाला घर में ले गई लोही पलंगिया पसुता के पक्सतना वही उपनापना हूं सूती गई लेकि रामर कैसा सुतलन कि अरे रामर पकरी के स
17:01दिखरा पाती अभरने लगानी दखर राती तो खोदी खोदी लगी जगावे जागे नाया नारिया हो समरिया नाहिया वैसे जरिया
17:22मंदोधरी समझ लिके बाप बाप बुझात की तार और फ्यूज भैल हो
17:43कहें कि करंद भी नहीं आवत बाद ये वैसे नहीं पता लगी ये वरिदम सड़ के पता लगाई
17:49कि मंदोधरी सड़ के लगल पता लगा ये भायल का बाद कि अरे मंदोधर तोव फेरी के हाथ बात कुछ जर बरबा अरे मंदोधर तोव फेरी के हाथ बात कुछ जर बरबा तक किसमत पकड़ी के ठोका मात बात कुछ जर बरबा
18:10अरे सूरज समान तेज़ था जिसमें कैसे हुआ वो पानी अरे टोवत हात दोल मौके पर मीलल नहीं निसानी बात कुछी जरबरबा
18:22आम मालुम हो गई लियो कातबात कुछी जरबरबा
18:27जान गई खलब बस बस अब सुतामत उड़के वैठाम से बतावा की कुल दुकान दौरी भाहिल कवनची मंदर अरे पुछत भाव कहिसे भाहिला एपिया
18:42कि दिनानाद भया कि अब पासु तफवाई दुकनियाव कनिया का भया पूछत भाँ कि यह रही जारवा कैसे भैलाए पिया अरे पूछा मंदोर गणही में डूबल पहार आवा ही जारवा कैसे भैलाए पिया
18:58कि यह रावन बतोले कि का बताई मंदोधरी एक दिन बिंद मत मिले लोके परसान के लिए इस राव जो दुलेबा मंदोधरी निकल जाती है जंगल में जाकर सीलिंग बना कर तपश्या करती है
19:21और जाकर जा दिन बतोले पैजी निक ने जाए लिए और जब बिंद मत मिले लेकिन कहला कि नीच नी चहीं है
19:50पुर्षत पाने के बाद रामर दूसरी गल्टी कर गया
19:53अब वह बतिया आ गई जो नहीं बतो ले गलन
19:55कि रामर सीता से मंगन मंग लेड़के हमरे यह तो के लंका में बरावक होई
20:00और यह लिए रामर किया क्या मजबूरन
20:02वही बात आ गई
20:04कि पुर्षत पाने के बाद दूसरी गल्टी कर दिया
20:06कौन्सी गल्टी बाभाई बाद
20:08हाए कि अरे नरे कवासी नरे कई में सुखा मानी पपिया
20:15हाए पाक्य पुर्षारे तो फिर करों लगा मन मानी पपिया
20:34कि अर्ष तो ज्वन वती से सीता है मत कई ल्यूहार नमा
20:41और रामाजी के हाँथे कर दावाई यह पन जना
20:45है लंचा नस करवाया वह भिमानि पपिया
20:49हाए पाक्य पुर्षारे त्विर कर लगा मन मान
20:54करदे लाश पंबूर्षारे की कर लगा मन मान
20:54तो गुरु विहारी गुर्वरेश गुरु राम लाल मुर्बाता और तथनकर चंद्रिका कभी बच्चन कभी जब बताता
21:14अरे ही जरवा कई से भई लाए पिया राम देश पूर स्याम यक पंखी दुल्पी जरवा ही जरवा कई से भई
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