00:00हमारे समाज में कई ऐसी परंपरा है जो पिछले कई सदियों से चली आ रही है उन्हीं में एक है दिपावली के दूसरे दिन दसा मसा जो जो ग्रामिन इलाकों में आज भी देखने को मिलती है ग्रामिन पुराने जालू, सूप, बटनी को लेकर घर में घुमते हैं और कहते है
00:30सूप का प्रवेज हो
01:00सुबा होते ही उसको वापस से घर के हर एक रूम के हर एक पूने में जा करके दसा मसा जो जो कर जो जो से नारा लगाया जाता है, और उसको घर से बाहर ले जांगे कहीं चौक-चौराई hot
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02:12४ूरुआ ४ूरु ।
02:17४ूरु ४ूरु प्रम्परा समाज को विरासत देती है,
02:19जो एक प्रिली से दूसरी प्रिजी तक पहुचती है।
02:22परम्परा समाज को एक त्याकस सुत्र में पिरोगर रखती भी है।
02:26५श्च इविवि भारत हजारी बाग
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