00:00आ गया रमजान
00:03आ गया रमजान
00:07आ गया रमजान
00:09असलाम वालाईकूम वर रह्मतुलाहिव वराकातू
00:13प्यारे बच्चेव आपने चूंटियों को तो देखा होगा
00:16ये आपके घर के लॉन में होती हैं
00:18टिवारों पर चल रही होती हैं
00:20कहीं कोई मीठी चीज़ पड़ी हो तो वहाँ भी आ जाती हैं
00:23ये देखने में तो छोटे छोटे कीड़े हैं
00:25मगर इनको अल्लाह पाग ने बड़ी समझ अता फर्माई हैं
00:28ये चूंटियां महनती होती हैं
00:30और बड़ी डिसिप्लेन के साथ रहती हैं
00:33मिलजुल कर रहती हैं
00:34और मिलजुल कर काम करती हैं
00:36और हैरत की बात ये है
00:38कि इन चूंटियों की एक मलका भी होती है
00:40जो इन्हें इंस्ट्रक्शन्स देती हैं
00:42प्यारे बच्चों
00:43चूंटियां अपना खाना जमा करने में माहिर होती हैं
00:46और अपना खाना किस तरह महफूद रखना है इसके लिए प्लैरिंग करती है चूंटियां गंदुम जमा करती है अगर भीगी गंदुम हो तो उसे खुश करती है फिर ऐसे तरीके से रखती है कि आइंदा ना भीग सके और दो टुकडों में काट कर रखती है ताके उग ना सक
01:16प्लैरिंग करती का एक वाकिया वियान हुआ है वह वाकिया यह है कि एक मरतबा अल्लह पाक के नभी हज़र सुलिमान अलहीज सलाम बहुत बड़ा लशकर लेकर एक वादी से गुजरे जहां बहुत ज्यादा चूंटियां थी लशकर को देख चूंटियों की मलका ने तमाम
01:46पर्मल रफ्तार से पैदल चरकर एक घंटे में हम तक्रीबन जितना लंबा फासला ते कर सकते हैं इतनी दूरी से आप अलहीज सलाम ने चूंटि की मलका की बात सुन ली उसकी बात पर हज़र सुलिमान अलही सलाम मुस्कुराए और अपने लशकर को रोक दिया ताकि चूं
02:16यानि यहां तक के जब वो चूंटियों की वादी पर आए तो एक चूंटियों अपने घरों में दाखिल हो जाओ कहीं सुलिमान और उनके लशकर बेखबरी में तुम्हें कुचल न डालें तो सुलिमान उसकी बात पर मुस्कुरा कर हस पड़ें प्यारे बच्चो इस कुर
02:46इनके देखने और सुनने की अबिलिटी और दूसरी पावर्ज आम इंसानों की पावर्ज से कहीं जादा होती हैं
02:53A gayah Ramazan, a gayah Ramazan, a gayah Ramazan.
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